
आगरा। भव रोग यानि यानि गर्भ धारण का समय। संत श्री विजय कौशल जी ने कहा कि कहा कि यह रोग इसलिए है कि क्योंकि इसे धारण करने वाला व गर्भ में रहने वाला दोनों को ही कष्ट भोगना पड़ता है, जिसकी औधषि सिर्फ कथा है। कथा सुनने से व्यक्ति का हर कष्ट और पापा दूर होता है।
नरसी का भात सुन झलके हर भक्त के अश्रु
आगरा। नरसी जी के भात की मार्मिक कथा सुन कर बहे अश्रुओं को छुपाने के लिए हर भक्त के जेब से रूमाल बाहर निकल आए। कथा के माध्यम से श्रीसंत विजय कौशल जी ने सामाजिक संदेश देते हुए संबधों की पवित्रता और सत्यता को भी समझाने का प्रयास किया। कहा संबंधी होने का अर्थ है कि जितना आप दूसरे से बंधे उतना ही दूसरा पहले बंधा है। लेकिन धन और पद दो ऐसे मद हैं जो एक मां के गर्भ से जन्में हैं। कहा पिता के सम्मान के लिए नरसी की बेटी रामा ससुराल में मेहरी बनने के लिए भी तैयार हो गई। पिता और पुत्री के पवित्र सम्बंधों का वर्णन सुन भक्त के रूप में कथा में उपस्थित हर माता-पिता का मन भर आया। अरी रामा री आज कन्हैया जी घर में आ गए हैं, इनसे मुरली नेक लेऊ बजवाए ले री... व मैं तो हूं संतन को दास, संत मेरे मुकुट मणी भजन पर भक्ति में डूबे भक्तों ने खूब नृत्य किया।
Published on:
14 Dec 2019 07:38 pm
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