
आगरा। यदि हम देश और शहर को स्मार्ट बनाना जाहते हैं तो इसके लिए स्मार्ट आर्केटेक्ट चाहिए। सिर्फ मशीनीकरण से काम नहीं चलेगा। इस क्षेत्र में अच्छे शिक्षक और अच्छे विद्यार्थियों की आवश्यकता है जो प्लानिंग और मैनेजमेंट को सीखें और काम करें। यह कहना था पूना के क्रिस्टोफर बेनेंजर (अमेरिका मूल के) का, जो पिछले 40 वर्षों से पूना में आर्केटेक्ट के विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
दो दिन चलेगी कांफ्रेंस
फतेहाबाद रोड स्थित होटल मुगल में यूपी आर्केटेक्ट एसोसिएशन व आगरा आर्केटेक्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय यूपी आर्केटेक्ट कॉन्फ्रेंस (स्मार्ट सिटी एंड रोल ऑफ आर्केटेक्ट्स इन रीशेपिंग न्यू इंडिया) का शुभारम्भ मुख्य अतिथि क्रिस्टोफर बेनेंजर ने दीप जलाकर किया। उन्होंने कांफ्रेंस में मौजूद विद्यार्थियों से कहा कि आर्केटेक्ट के क्षेत्र में कुछ मुकाम हासिल करना है तो कम्प्यूटर की बजाय हाथ से ड्राइंग करें। हाथ से ड्राइंग करने के लिए हस्तकला प्रदर्शनी भी आयोजित करनी चाहिए। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्केटेक्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिव्य कुश ने कहा कि आर्केटेक्ट कमीशन ऑफ इंडिया व स्टेट कमीशन के लिए हम लगातार सरकार से प्रयास कर रहे हैं। काउंसिल ऑफ आर्केटेक्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व रंजन नायक ने कहा कि कांफ्रेंस के विषय स्मार्ट सिटी एंड रोल ऑफ आर्केटेक्ट इन रीशेपिंग न्यू इंडिया पर प्रकाश डाला। यूपी आर्केटेक्ट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष राजीव द्विवेदीने कहा कि भारतीय वास्तुकला के इतिहास में आगरा का बहुत बड़ा महत्व है। पुराने समय में यांत्रिक साधन व बिजली जैसी सुविधाएं नहीं थीं, फिर भी बेहतरीन इमारतों का निर्माण हुआ। कहा कि आर्केटेक्ट का काम सिर्फ भवन निर्माण नहीं, नीति निर्माण भी है। जिसमें सरकार हमारी सहायता नहीं लेती। शहर को देश को स्मार्ट बनाने के लिए डवलपमेंट व प्लानिंग के क्षेत्र में नीतिया बनाते समय सरकार को आर्केटेक्ट की भी सलाह लेनी चाहिए। स्मार्ट सिटी के लिए प्लानिंग का काम डेवलेपमेंट अथॉरिटी का है और मैनेजमेंट नगर निगम को देखना हैं लेकिन इन दोनों के बीच में सामंजस्य की कमी है। ऐसे में पुरानी और खराब चीजों को सही करने के बाद नगर निगम उसका सही तरह से मैनेजमेंट करे, यह जरूरी है। उन्होंने एसोसिएशन की वार्षिक रिपोर्ट भी पढ़ी।
शहरों को स्मार्ट बनाने का काम शुरू
आर्किटेक्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य शशि शिरोमणि ने कहा कि मुगल काल और उसके बाद ब्रिटिश काल से ही शहरों को स्मार्ट बनाने का काम शुरू हो गया था। अकबर ने आगरा के बीहड़ में डेवलेपमेंट किया। ब्रिटिश काल में इन बीहड़ के टीलों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए पुलिया बनाई गई, यह स्मार्ट सिटी की तरफ पहला कदम था। आगरा की लेंडस्केपिंग ही इसकी खूबसूरती थी जो अब समतल करके खत्म की जा रही है। दो दिवसीय कांफ्रेंस में आने वाले सुझावों को सरकार के पास भेजा जाएगा। कार्यक्रम के प्रारम्भ में शशि तिवारी ने गणेश वंदना की। आर्किटेक्ट एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष बीके शर्मा, सचिव अर्चना यादव ने परिचय कराया। कांफ्रेंस में दुनिया भर के बिल्डिंग मटीरियल की एग्जीबिशन लगाई गई। धन्यवाद ज्ञापन एसोसिएशन के सीनियर मैम्बर शशि शिरोमणी ने दिया। संचालन देविना अग्रवाल, सौरभ सक्सेना ने किया।
वरिष्ठ आर्किटेक्ट को किया सम्मानित
समारोह में 75 साल से अधिक उम्र के आर्केटेक्ट्स को सम्मानित किया गया। केपी सिंह मुजफ्फर नगर, आगरा के डीपी सिंह, एसपी अग्रवाल, शशि शिरोमणि और लखनऊ के मनीष चंद्रा को सम्मानित किया गया।
यह रहे मौजूद
कांफ्रेंस में कमेटी के ध्रुव कुलश्रेष्ठ, सीएस गुप्ता, किरन गुप्ता, रजत अग्रवाल, संगीता अग्रवाल, स्मृति जैन, ललित द्विवेदी, अश्वनी शिरोमणी, गौरव शर्मा, अंकुर मांगलिक, जीपी भटनागर, एसपी अग्रवाल, राजीव द्विवेदी, बीके शर्मा, सुधांशु जैन, अमित अग्रवाल, अश्वनी शर्मा, पुष्पेन्द्र सिंह, अश्वनी गुप्ता आदि उपस्थित थे।
Published on:
24 Feb 2018 06:31 pm
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