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World Hindi Day 2020: खिचड़ी भाषा सीख रहे युवा, केन्द्रीय हिंदी संस्थान की कुलसचिव ने बताया कि अंग्रेजी के पीछे न लगायें दौड़

World Hindi Day 2020 पर केन्द्रीय हिंदी संस्थान की कुलसचिव डॉ. बीना शर्मा से विशेष बातचीत। युवा भाग रहे अंग्रेजी के पीछे, भूल गए मातृभाषा

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आगरा

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Dhirendra yadav

Jan 09, 2020

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आगरा। World Hindi Day 2020 पर हम बात करने जा रहे हैं, कि आज हिंदी के प्रति इतना जागरुक किया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी आज का युवा वर्ग अंग्रेजी को प्राथमिकता देता है। इसका कारण क्या है। इस बारे में जब पत्रिका टीम ने केन्द्रीय हिंदी संस्थान की कुलसचिव बीना शर्मा ने से बात की तो उन्होंने बताया कि ये सवाल सामाजिक स्तर से जुड़ा हुआ है। हम में से सबको लगता है अंग्रेजी पढ़ने और बोलने से हमारा स्तर बढ़ जाएगा। हमें ऐसे प्रोफेशनल कोर्स में एडमीशिन मिल जाएगा, जिनसे मोटे अंकों की तनख्वा मिल जाए। हम मल्टीनेशनल कंपनियों में जा सकें। विदेशों में जाकर नौकरी कर सकें। क्योंकि आज हर भारतीय माता पिता का सपना ये है कि उनका बच्चा भले ही अपनी जड़ से कट जाए, लेकिन उनके घर में सारे भौतिक संशाधन उपलब्ध हो जाएं। उस भागदौड़ के कारण, उस लक्ष्य को पाने के लिए हम अपनी हिंदी भाषा को, जिसे सारे देश अपना रहे हैं, जिसकी परीक्षा पास करने के लिए भारत आते हैं। सारे अहिंदी भाषी जिस हिंदी को सीख रहे हैं।

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इसलिए अंग्रेजी के पीछे भाग रहे युवा
हम सब वहीं हिंदी के मूलभाषी, जहां हमारी हिंदी मातृभाषा है। उससे धीरे धीरे कट रहे हैं। क्योंकि अभी तक हमने ये जानने का प्रयास ही नहीं किया है, कि मातृभाषा का किसी व्यक्ति के जीवन में क्या स्थान होता है। मातृभाषा को छोड़कर आप किसी भी अन्यभाषा के पीछे भाग लीजिए, वह आपकी भाषा नहीं है और यही कारण है कि नव युवक अंग्रेजी का सहारा लेकर तो जाते हैं, लेकिन जिन देशों में अंग्रेजी को अपनी वैशाखी बनाकर ले जाते हैं, वह भी छूट जाती है, वो ना हिंदी सीखते हैं और ना अंग्रेजी सीखते हैं, आजकल एक नई भाषा का जन्म हुआ है, जिसे खिचड़ी भाषा कहते हैं।


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कोई दो उदाहरण भी नहीं

उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे कोई दो उदाहरण भी नहीं है, जहां कोई दो वाक्य शुद्ध हिंदी के बोल सके। हर वाक्य में चार से पांच शब्द अंग्रेजी के हाते हैं। क्योंकि उसे कभी ये नहीं सिखाया गया, कि जिस भाषा पर भी अधिकार रखें, कि एक भाषा पर आपकी पूरी तरह कमांड होनी चाहिए। हमारे अध्यापक जिस भाषा को बोलेंगे, छात्र वही भाषा ग्रहण करता है। अफसोस की बात ये है कि जब इन छात्रों की कॉपियां जांच करने के लिए आती है, तो किसी एक पेज में यदि 100 शब्द लिखे गए हैं, तो उसमें से 75 शब्द अंग्रेजी के होते हैं।

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जानकारी का अभाव बड़ा कारण
उन्होंने बताया कि हिंदी के विषय में जानकारी का अभाव बड़ा कारण है। वे नहीं जानते कि आज हिंदी का स्तर कितना उंचा हो गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक हमने हिंदी को व्यवसाय के रूप में अपनाया है, अभी तक हमने हिंदी को अपनी सांस्कृतिक ख्याति के रूप में नहीं अपनाया है।

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