
रोकना होगा भारत को विश्व में आत्महत्या की 'राजधानी' बनने से: डॉ राठौर
आगरा। अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संगठन एवं विश्व स्वास्थ्य संघठन के आह्वान पर हर वर्ष की भांति आज विश्व भर में 10 सितंबर को आत्महत्या रोकथाम दिवस आयोजित किया गया। उक्त शीर्ष संगठनों ने विश्व के मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत, प्रशासनिक, राजनैतिक, गैर-सरकारी संगठनों आदि को समाज में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति/घटनाओं के रोकथाम हेतु जनजागृति के कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की।
प्रभावी कदम उठाने जाने की आवश्यकता
इस दिवस को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस तथा 10 सितंबर से प्रारंभ हो रहे सप्ताह को विश्व आत्महत्या सप्ताह के रोप में मनाया जाएगा। आज इसी के अंतर्गत आरोग्य भारती, आगरा महानगर द्वारा शहीद स्मारक पर जन जागरूकता के लिए प्रबुद्ध जनों की संगोष्ठी तत्पश्चात आत्महत्या के शिकार लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन, दीप प्रज्वलित कर प्रार्थना की गई। इस कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डा. दिनेश राठौर ने बताया कि प्रतिवर्ष विश्व में आठ लाख लोग आत्महत्या के कारण मृत्यु का शिकार बनते हैं। विश्व में प्रति 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है। जिसमें 25 से 44 वर्ष के व्यक्तियों की संख्या 70% होती है। चूंकि भारत में युवा जनसंख्या अधिक है अतः भारत विश्व में आत्महत्या की राजधानी बनने की ओर बढ़ रहा है। इसकी रोकथाम के लिए हर स्तर से प्रभावी कदम उठाने जाने की आवश्यकता है।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में सत्यधर द्विवेदी, आर. के. सिंह राघव, बृज क्षेत्र संयोजक भाजपा नीति विषयक शोध विभाग, समाज सेवी राजीव चौहान, नितीन गुप्ता प्रांत कार्यकारिणी क्रीड़ा भारती आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
Published on:
10 Sep 2018, 11:03 PM IST
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