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सीएम योगी का तगड़ा एक्‍शन, लोकसभा चुनाव से पहले छीनी जाएगी इन नेताओं की ‘सिक्योरिटी’

UP News: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले योगी सरकार सख्त एक्‍शन में है। इसके तहत यूपी के आगरा जिले में सरकारी सुरक्षा लेने वाले नेताओं की समीक्षा शुरू हो गई है। जल्द ही इनकी सुरक्षा हटाई जाएगी।

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आगरा

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Vishnu Bajpai

Feb 05, 2024

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CM Yogi Action: उत्तर प्रदेश की ताजनगरी आगरा के पुलिस कमिश्नर जे रवींद्र गौड ने बताया कि आगरा में भाजपा सांसद-विधायक समेत 76 लोगों के पास सरकारी सुरक्षा है। यहां भाजपा नेता, समाजसेवी और कारोबारियों ने भी गनर ले रखा है। पहले यह संख्या 100 के पार थी, लेकिन उनके कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने उन लोगों की सुरक्षा हटा दी है। जिन्होंने गनर रखने के लिए समिति से अनुमति नहीं ली थी। यानी बिना अनुमति के आगरा में करीब 25 लोगों को सुरक्षा दी गई थी। इनमें से कुछ लोग तो गनर लेकर शॉपिंग करने भी जाते थे। गनर को परिवार वालों की बातें भी माननी पड़ती थीं। बहरहाल, अब यहां सरकारी सुरक्षा व्यवस्‍था की समीक्षा शुरू हो गई है। जल्द ही कई लोगों की सुरक्षा वापस ली जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में योगीराज कायम हैं। यहां विशेष सुरक्षा की कोई जरूरत नहीं है।


दरअसल, जनवरी में पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड ने चार्ज संभालते ही उन लोगों के गनर वापस बुला लिए। जो समिति से स्वीकृत नहीं थे। ऐसे लोगों के पास गनर थे जो सुरक्षा के लिए पात्र ही नहीं हैं। उनके पास कोई पद नहीं है। सिर्फ रौब गांठने के लिए गनर ले रखे थे। पुलिस आयुक्त जे रविंदर गौड से शिकायत हुई थी। देहात के एक नेता को तीन गनर मिले हुए थे। गनर के अतिरिक्त भी पुलिस कर्मी सुरक्षा में साथ चलते थे। जिन 76 लोगों के पास गनर हैं, उनमें से सांसद और विधायकों के साथ ही दो पूर्व विधायक भी हैं। इनमें से एक सपा से और दूसरे बसपा से भाजपा में आए थे। दो ब्लाक प्रमुख के साथ कुछ भाजपा पदाधिकारियों के पास भी गनर हैं। कमिश्नर का कहना है कि योगी सरकार की मंशा है कि जरूरतमंद को ही सुरक्षा व्यवस्‍था मुहैया करवाई जाए। इसके बावजूद बिना जरूरत कुछ नेता और कारोबारियों समेत समाजसेवियों को गनर अलॉट किए गए हैं। इनकी अब समीक्षा हो रही है।

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भाजपा और अधिकारियों के करीब रहने वाले कुछ व्यापारियों के पास गनर है। इनमें से एक ताजगंज क्षेत्र में रहने वाले ठेकेदार हैं। जबकि एक रकाबगंज क्षेत्र में व्यापार करने वाले हैं। सत्ता के साथ ही गनरों का ठिकाना बदल जाता है। सवाल यह उठता है कि वर्तमान में क्या जान का खतरा केवल भाजपा नेताओं को ही है। आगरा कमिश्नरेट में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी हैं। पुलिस रिकार्ड के अनुसार इनमें से 76 पुलिसकर्मी विशिष्टजन और गवाहों के साथ ही अन्य लोगों की सुरक्षा में लगे हुए हैं। मंत्री और विधायकों के साथ ही कुछ पूर्व विधायकों को भी गनर आवंटित हैं। इनमें से कुछ गनर ऐसे लोगों को भी दे दिए गए जो ठेकेदारी करते हैं या अन्य व्यापार करते हैं। कई तो इसके एवज में सौ प्रतिशत तक मासिक भुगतान भी करते हैं।


एक बार फिर नए सिरे से सूची तैयार हो रही है डीसीपी लाइन ने समीक्षा के निर्देश दिए हैं। एसीपी लाइन ने जांच शुरू कर दी है। समीक्षा के बाद कई लोगों की सुरक्षा छिन सकती है। वास्तव में इन लोगों को सुरक्षा की जरूरत ही नहीं हैं। इनके पास लाइसेंसी हथियार हैं। इसके बावजूद गनर ले रखे हैं किसी से कोई खतरा भी नहीं है। पुलिस आयुक्त जे. रविन्दर गौड ने पिछले दिनों में सात गनर वापस कर लिए। डीसीपी पश्चिमी जोन और डीसीपी पुलिस लाइंस सोनम कुमार ने बताया कि सांसद और विधायकों को नियमानुसार गनर दिए गए हैं। इसके अलावा कुछ गनर मुकदमों के गवाहों व ऐसे लोगों को दिए गए हैं, जिनको जान का खतरा है। चुनाव से पहले समीक्षा चल रही है। समीक्षा के बाद गनर वापस लेने पर निर्णय उच्च अधिकारियों द्वारा लिया जाएगा।

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सांसद-विधायक को एक-एक गनर पद के साथ मिला हुआ है। एक गनर से काम नहीं चलता इसलिए कम से कम दो तो होने चाहिए। दूसरा गनर शासन से स्वीकृत करा रखा है। यह 10 से 25 प्रतिशत खर्चे पर मिला हुआ है। सांसद-विधायक के साथ गनर रहे तो कोई सवाल नहीं उठता। वे कहीं भी पहुंचते हैं तो भीड़ जमा हो जाती है। सत्ताधारी पार्टी के दूसरे नेता भी गनर लेने में पीछे नहीं हैं। उन्हें भी तब अच्छा लगता है जब कहीं जाने पर उनसे पहले गनर गाड़ी से उतरता है। हाल ही में सिपाहियों के लिए बीट का आवंटन हुआ है।


पुलिस आयुक्त जे. रविन्दर गौड ने बताया पूरे प्रदेश में कानून का राज है। अपराधी भयभीत हैं ताबड़तोड़ एनकाउंटर हो रहे हैं। जेलें बदमाशों से भरी पड़ी हैं बदमाश प्रदेश छोड़कर भाग रहे हैं। अधिकारी यह दावा करते हैं इसके बावजूद नेताओं को जान का खतरा है। सांसद, विधायक छोड़िए दूसरे नेताओं को भी गनर चाहिए। जिले में करीब 76 लोगों को सुरक्षा मिली हुई है। ज्यादातर भाजपा नेता हैं इसके अलावा कारोबारी, समाजसेवी और मुकदमे के गवाह भी शामिल हैं। दो माह पहले यह संख्या 100 से ऊपर थी।

गनर का आधार बनाने के लिए पहले धमकी और जान का खतरा का एक मुकदमा लिखाया जाता है। सवाल यह उठता है कि जिससे जान का खतरा है पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करें। धमकी जिसने दी है उसका पता लगाए। जेल चला जाए तो गनर हटा लिया जाए। धमकी की जांच नहीं होती एक पूर्व माननीय के पास एक नहीं दो गनर है। धमकी भरा पत्र मिला था, गनर सालों से चल रहे हैं। छह हजार लोगों पर एक बीट बनाई गई है। मतलब छह हजार लोगों के बारे में जानकारी रखने की जिम्मेदारी एक सिपाही को दी है। बड़ी संख्या में सिपाही गनर बनकर सिर्फ एक नेता की सुरक्षा कर रहे हैं।

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भाजपा के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों पर लाखों रुपये का बकाया है। कुछ माह पूर्व शासन से नोटिस आया था। गोपनीय रूप से नेताओं को नोटिस भेजा गया। उन्होंने नोटिस तक नहीं लिया। उसके बाद उन्हें डाक से नोटिस भेजा गया। सूत्रों की मानें तो दोनों पदाधिकारियों के ऊपर सात-सात लाख रुपये से अधिक बकाया हैं। उनके पास गनर है बकाया जमा नहीं करने पर भी उनके गनर हटाए नहीं गए हैं। दोनों सत्ताधारी पार्टी से हैं इसलिए। कई लोग ऐसे हैं जिनके पास खुद के लाइसेंसी शस्र हैं। इसके बावजूद उन्होंने सुरक्षा के लिए गनर ले रखा है। जिन लोगों को वास्तव में जान का खतरा है वे सुरक्षा के लिए चक्कर लगाते रहते हैं। उनसे कह दिया जाता है कि तारीख वाले दिन थाने से पुलिस कर्मी दीवानी न्यायालय साथ जाएंगे। जो किसी मुकदमे में गवाह नहीं हैं, वे गनर लेकर चलते हैं। यह भी सवाल उठता है कि पुलिस ऐसे मामलों को जांच कर क्यों नहीं निपटाती।

पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड ने कहा गनर को शहर छोड़ने से पहले लाइन से अनुमति लेनी होती है। उसे जिसकी सुरक्षा में लगाया जाता है उसके साथ बाहर जाने से पहले गनर पुलिस लाइन में सूचना देता है। अनुमति लेता है। जिले में कहीं भी जाने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती है। किसे गनर मिला हुआ है। कितने समय से है। उसे खतरा किससे है। कब मुकदमा लिखाया है। किस मुकदमे में वादी है। यह सब एक बार फिर नए सिरे से देखा जा रहा है।

डीसीपी लाइन सोनम कुमार ने बताया कि एसीपी लाइन आदित्य पूरे मामले को देख रहे हैं। समीक्षा के बाद जिन्हें जरूरत नहीं है उनके गनर वापस बुलाए जा सकते हैं। शासन से भी गनर स्वीकृति के लिए रिपोर्ट जिले से जाती है। कई ऐसे लोगों के पास गनर हैं जो प्राइवेट सुरक्षा कर्मी रख सकते हैं, पूंजीपति हैं। इसके बावजूद उन्होंने सरकारी गनर रखा है। ताकि वर्दी वाला साथ चले तो समाज में रौब गांठ सकें। जबकि उन लोगों को किसी से कोई खतरा नहीं है। शासन से गनर स्वीकृति के लिए जिले से ही रिपोर्ट भेजी जाती है तो सवाल यह उठ रहा है कि जिले से उनके पक्ष में रिपोर्ट किस आधार पर भेजी गई।

-आगरा से प्रमोद कुशवाह की रिपोर्ट

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