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झोंपड़पट्टियों के150 बच्चों को निशुल्क भोजन की व्यवस्था

शहर में कई जगहों पर....-नोटबुक व वों का भी करते हैं दान-राजस्थान मूल के युवक ने उठाया बीड़ा

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झोंपड़पट्टियों के150 बच्चों को निशुल्क भोजन की व्यवस्था

अहमदाबाद. शहर के कुछ जगहों पर झुग्गी झोंपडिय़ों में रह रहे लगभग १५० बच्चों की भोजन की निशुल्क व्यवस्था का बीड़ा राजस्थान मूल के एक युवक ने उठाया है। भोजन के अलावा वह इन गरीब बच्चों के लिए नोटबुक व वों का दान भी करते हैं। उनका कहना है कि आत्मसंतोष के लिए उसने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर तीन वर्ष पहले इसकी छोटे स्तर से शुरुआत की थी।
शहर के नारोल क्षेत्र में रह रहे अनिल शर्मा (३३) मूल राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की भादरा तहसील के मेहरिया गांव के हैं। पिछले तेरह वर्ष से नारोल में ही ट्रान्सपोर्ट के व्यवसाय से जुड़े अनिल शर्मा का कहना है कि तीन वर्ष पूर्व उन्होंने प्रति रविवार को गरीब बच्चों को भोजन कराना शुरू किया था। लेकिन गत दस जून से वे प्रतिदिन सुबह गरीब बच्चों को झुग्गी झोंपडियों के आसपास जाकर भोजन कराते हैं। इसके लिए उन्होंने प्रेरणा जनसहयोग ट्रस्ट का भी गठन किया है। उन्होंने भोजन की इस व्यवस्था का नाम 'रोटी बैंकÓ दिया है। अनिल के सहयोगी राजन सोनी ने बताया कि इस कार्य में उनके साथ कुछ मित्र भी साथ में आए हैं। इन बच्चों को भोजन के अलावा जरूरत के आधार पर उन्हें नोटबुक और पेंसिल भी दान में दी जाती हैं। कभी-कभी वों का दान भी किया जाता है। कुछ दिनों तक गरीब बच्चों को पढ़ाना भी शुरू किया था लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण यह व्यवस्था ज्यादा नहीं चल पाई। भोजन की व्यवस्था में प्रतिदिन लगभग साढ़े तीन हजार रुपए खर्च होते हैं।
खुद तैयार करते हैं खाना
अनिल भाई का कहना है कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन को वे खुद तैयार करते हैं। कभी-कभी उनके पास समय का अभाव होता है तो वे किसी होटल से भी भोजन खरीदते हैं। भोजन बनाने के काम में उनकी पत्नी सोनम शर्मा भी मदद करती हैं। फिलहाल नारोल चौकड़ी, मणिनगर में आवकार हॉल के निकट व घोड़ासर गांव के आसपास झोंपड़पट्टियों में रहने वाले बच्चों को सुबह भोजन कराया जाता है।
'गर्मी की आग पर भारी है पेट की आगÓ
गरीब बच्चों को भोजन कराने की शुरुआत के पीछे कारण अलग ही बताया। अनिलभाई का कहना है कि एक कड़ी धूप में घर से ऑफिस जा रहे थे। उस दौरन नारौल चार रास्ते पर एक बच्चे ने बिस्किट लेने के लिए पांच रुपए मांगे थे। भीषण गर्मी के बीच भी वह बच्चा नंगे पैर था। अनिलभाई का कहना है कि बच्चे को पास से लाकर चप्पल दी गई थी लेकिन बच्चे ने चप्पल तब पहनी थी जब बिस्किट के लिए उसे पांच रुपए दिए गए थे। इस घटना से विचलित होकर उसने गरीब बच्चों को यह व्यवस्था शुरू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भूख के आगे उस बच्चे को पैर के जलने का भी आभास नहीं हो रहा था।