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गुजरात में 8 हजार अपराधियों पर 8 हजार पुलिस कर्मियों की नजर

-मेंटर प्रोजेक्ट से संपत्ति संबंधी अपराध में आई कमी

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DGP Vikas sahay

Ahmedabad. गुजरात पुलिस ने संपत्ति संबंधी अपराध और नशीले पदार्थों के मामलों में कमी लाने के लिए 2023 से शुरू किए मेंटर प्रोजेक्ट के परिणाम भी दिखने लगे हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत राज्य में संपत्ति संबंधी और नशीले पदार्थों की तस्करी, बिक्री में लिप्त अपराधियों पर दिन, रात नजर रखी जाती है। राज्य में ऐसे आठ हजार अपराधियों की सूची तैयार करके उन पर नजर रखी जा रही है।

गुजरात पुलिस के महानिदेशक विकास सहाय ने दीपावली के दिन इस संबंध में साझा की जानकारी में बताया कि राज्य में अपराध को रोकने, कम करने के लिए कई पहल की गई है। इसमें से एक पहल है , मेंटर प्रोजेक्ट। इसके तहत राज्य में होने वाले संपत्ति संबंधी अपराध नारकोटिक्स मामलों को कम करने की कोशिश की जा रही है। प्रोजेक्ट के तहत बीते पांच साल में संपत्ति संबंधी अपराध या नारकोटिक्स मामलों में पकड़े गए आरोपी की सूची तैयार की गई है।

इस सूची को आरोपी अभी जिस शहर या जिले में रह रहे हैं उस जिले के पुलिस आयुक्त और पुलिस अधीक्षक को भेजी गई है। सीपी और एसपी ने आरोपी जिस थाना क्षेत्र में रहते हैं, उसके अनुसार सूची तैयार कराई है और थानों को सूची भेजी।

थाने का पुलिस कर्मी ही रखता है नजर

डीजीपी ने बताया कि एक आरोपी पर एक पुलिस कर्मचारी को मैंटर बनाया है। ये कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल, एएसआई, पीएसआई कोई भी हो सकता है। वह पुलिस कर्मचारी लगातार आरोपी पर नजर रखता है। दिन, रात उसकी गतिविधि, कार्य की मॉनीटरिंग करता है। पुलिस कर्मचारी की जिम्मेदारी है कि उसे जिस आरोपी का मैंटर बनायै है वह आरोपी नए सिरे से कोई अपराध नहीं करे। जरूरत पड़ने पर वह आरोपी की काउंसिलिंग भी करे।

मेंटर प्रोजेक्ट के चलते संपत्ति संबंधी अपराध घटे

डीजीपी सहाय ने दावा किया कि इस मेंटर प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद से हमने देखा है कि बीते एक डेढ़ साल में गुजरात में होने वाले संपत्ति संबंधी अपराधों में कमी आई है। इतना ही नहीं जो अपराध हुए हैं उन्हें सुलझाने की दर (डिटेक्शन रेट) भी सुधरा है। क्योंकि संपत्ति संबंधी और नारकोटिक्स संबंधी अपराध में ज्यादातर पुराने आरोपी ही फिर से वारदात को अंजाम देते हैं। 2023 की तुलना में 2024 में संपत्ति संबंधी अपराध में 22 फीसदी की गिरावट देखी गई।