No video available
Ahmedabad. उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैंड और मणिपुर से फर्जी लाइसेंस बनवाकर पिस्तौल, रिवॉल्वर बेचने के रैकेट का पर्दाफाश कर चुकी गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की टीम ने ऐसे ही एक और नए रैकेट का पर्दाफाश किया है। ये नया रैकेट उत्तरप्रदेश के एटा जिले से जुड़ा है। गिरोह के सदस्य एटा से फर्जी लाइसेंस बनवाकर, हथियारों की बिक्री कर रहे थे। इस मामले में 9 लोगों को पकड़ा है, जिसमें से सात आरोपी 16 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर हैं। नागालैंड, मणिपुर नेटवर्क मामले में 65 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
एटीएस के उपाधीक्षक एस एल चौधरी ने बताया कि इस पूरे गिरोह का मास्टर माइंड देवकांत पांडे और श्याम सिंह उर्फ राजू चौहान है। ये दोनों श्याम सिंह ठाकुर की मदद से उत्तरप्रदेश के एटा जिले से फर्जी हथियार का लाइसेंस बनवाते और उस लाइसेंस तथा हथियार (रिवॉल्वर, पिस्तौल और गन) को अहमदाबाद लाकर बेचते थे। प्राथमिक जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने 2019 से लेकर 2022 तक कई लोगों को फर्जी लाइसेंस और हथियार बेचे हैं। पांच लाख से लेकर 11 लाख रुपए तक वसूले हैं।
इस सूचना पर अलग-अलग टीमें बनाकर शहर के अलग अलग हिस्सों में दबिश देकर 9 लोगों को पकड़ा है। इनके पास से 9 हथियार (4 पिस्तौल, तीन रिवॉल्वर, दो बंदूक) तथा 285 राउंड जब्त किए हैं। पकड़े गए आरोपियों में मुकेश सिंह चौहान, अभिषेक त्रिवेदी, वेदप्रकाश सिंह , राजेन्द्र सिंह सांखला, अजय सिंह सेंगर, शोलेसिंह सेंगर और विजय सिंह सेंगर शामिल हैं। इसके अलावा श्याम सिंह ठाकुर तथा हिम्मत सिंह राजपूत को भी गिरफ्तार किया है। इनके विरुद्ध एटीएस में 12 जुलाई को बीएनएस और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
एटा जाए बिना, इंटरव्यू दिए बिना पाया लाइसेंस, हथियार
चौधरी ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ के दौरान कबूला कि वे कभी एटा के बताए पते पर रहने नहीं गए। ना ही धंधा या नौकरी करने गए। ना ही हथियार का लाइसेंस पाने के लिए एटा कलक्टर के समक्ष कोई इंटरव्यू दिया। इतना ही नहीं इनमें से ज्यादातर के पास हथियार खरीदने से जुड़ी किसी गन हाऊस के रजिस्टर में एंट्री भी नहीं मिली है। आरोपी पैसे लेकर लाइसेंस और साथ में ही हथियार भी खुद ही देते थे।
इस व्यक्ति ने दिए इतने रुपए
प्राथमिक जांच में सामने आया कि अभिषेक त्रिवेदी ने लाइसेंस और हथियार के लिए पांच लाख , विजय सिंह सेंगर ने 5.50 लाख, अजय सिंह सेंगर, राजेन्द्र सिंह सांखला, मुकेश सिंह चौहान ने सात-सात लाख रुपए दिए हैं। वेदप्रकाश सिंह और शोले सिंह सेंगर ने 11-11 लाख रुपए देकर लाइसेंस और हथियार खरीदे हैं।
कई और लोगों के खुलेंगे नाम
एटीएस सूत्रों के तहत इस गिरोह के पास से कई और लोगों ने भी हथियार खरीद हैं। ऐसे में कुछ और नाम सामने आएंगे। इस मामले में पकड़े गए आरोपियों में से एक का अहमदाबाद के एक विधायक और उनके भाई से अच्छे संबंध होने की बात सामने आई है।