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भावनगर : सूक्ष्म नक्काशी की अद्भुत विरासत है चारोडिया गांव की वाव

पालीवाल ब्राह्मण समाज ने करीब ४०० वर्ष पूर्व बनवाई थी

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Bhavnagar : Charodia Vav

Bhavnagar : Charodia Vav

राजकोट. भावनगर जिले की गारियाधार तहसील के मोटा चारोडिया गांव में स्थित वाव सूक्ष्म नक्काशी की अद्भुत विरासत है। प्राचीन सांस्कृति के इतिहास को जीवंत बनाने वाली इस वाव का निर्माण मूल राजस्थान के पाली जिले के पालीवाल ब्राह्मण समाज की ओर से कराया गया था। करीब ४०० वर्ष पूर्व राहगीरों को पानी की परेशानी नहीं हो, इसके लिए वाव का निर्माण कराया गया था।
मूलरूप से पाली जिले के पालीवाल ब्राह्मण वर्षों पहले गुजरात में स्थायी हुए थे, जिनमें से अनेक ब्राह्मण परिवार भावनगर जिले में रहने लगेेेे थे। आर्थिक रूप से संपन्न पालीवाल ब्राह्मण गारियाधार तहसील के मोटा चारोडिया गांव में रहते थे। ऐसे में राहगीरों को पानी की समस्या नहीं हो, इसके लिए उन्होंने इस वाव का निर्माण कराया था।


वाव की नवीनता :
शिल्पकला की उत्कृष्ट आकृतियों वाली यह वाव चार मंजिला है, जिनमें १२ मेहराब हैं। प्रथम मंजिल पर छह मेहराब, दूसरी मंजिल पर चार व तीसरी एवं चौथी मंजिल पर एक-एक मेहराब हैं। मेहराब को सहारा देने के लिए कुल ३८ स्तंभ हैं, जिनकी चुनाई पत्थर, चूना व रेती से की गई है।
करीब १६१ फीट लम्बी यह वाव ७० फीट गहरी है। गोलाकार आकृति वाली इस वाव का ७० फीट तक पत्थर से निर्माण कार्य किया गया है। चुनाई पूरी होने के बाद वाव ३० और फीट गहरी है।

वाव की प्रथम मंजिल की मेहराब की ऊंचाई १७ फीट है। सीढिय़ों के चौक में दोनों ओर दो आले (गोख) हैं, जिनमें एक ओर श्रीकृष्ण की प्रतिमा व दूसरी ओर शिल्पकला की उत्कृष्ट आकृर्तियां बनाई गई हैं। प्रथम मंजिल के दरवाजे में चौक है, जहां २५-३० व्यक्ति खड़े रह सकते हैं। वाव में दोनों ओर दीवारों के सहारे पौने दो फीट की सीढिय़ां बनाई गई है, जिनसे उतरते समय पूरी वाव को देखते हुए कुएं तक पहुंच सकते हैं।

वाव को सुरक्षित स्मारक बनाने की मांग

पालीवाल ब्राह्मण समाज की ओर से पानी की आवश्यकता एवं उमदा सेवा के लिए करीब ४०० पूर्व यह वाव बनाई गई थी। इस वाव को सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता है, जिससे यह वाव कला एवं सेवाकार्य के लिए अन्य लोगों को प्रेरणा दायक साबित होगी। श्री जयाबेन फाउंडेशन-राजकोट की ओर से मुख्यमंत्री, पुरातत्व विभाग के मंत्री, विधानसभा में विरोधपक्ष के नेता एवं पुरातत्वविभाग के निदेशक से मांग की है कि इस वाव को बचाने के लिए सुरक्षित स्मारक घोषित किया जाए।
-परेश पंड्या-प्रबंध न्यासी, श्री जयाबेन, राजकोट