
गांधीनगर. जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से तेरापंथ टास्क फोर्स के द्विदिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।
गुजरात की राजधानी गांधीनगर के पास कोबा में स्थित प्रेक्षा विश्व भारती में आचार्य के चातुर्मास के तहत आयोजित सम्मेलन में देश भर करीब 150 से अधिक युवा हिस्सा ले रहे हैं। आचार्य ने मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के दौरान संभागियों को प्रेरणा प्रदान की।
वीर भिक्षु समवसरण में आयारो आगम के माध्यम से उन्होंने कहा कि चारों कषायों पर विजय प्राप्त करना धर्मयुद्ध है। आगम में आदमी को अपनी आत्मा से युद्ध करने की बात बताई गई है। आत्मयुद्ध के द्वारा आत्मा से चिपके हुए कर्मों को क्षीण करने, उन्हें नष्ट करने का प्रयास करना चाहिए। पच्चीस बोल का सोलहवां बोल है कि आठ प्रकार की आत्माएं होती हैं- द्रव्य, कषाय, योग, उपयोग, ज्ञान, दर्शन, चारित्र और वीर्य आत्मा। इन आठ आत्माओं में एक है कषाय आत्मा है।
आचार्य ने कहा कि कषाय, अशुभ योग और मिथ्या दर्शन को नष्ट करना है तो उसका तरीका है कि आदमी को शुभ योग आत्मा का उपयोग, संयम दर्शन आत्मा को पुष्ट करना है और चारित्र आत्मा के विकास का प्रयास करना होगा। शुभ योग आत्मा को पुष्ट करें और संयम दर्शन आत्मा को पुष्ट करें तो इनसे कषाय आत्मा नष्ट हो सकेगी। कषाय आत्मा का अस्तित्व दसवें गुणस्थान तक बना रहता है। बारहवें गुणस्थान पर पहुंचने में कषाय आत्मा पूर्णतया समाप्त हो जाती है। इसलिए शास्त्र में कहा गया है कि आदमी को अपने कार्मण शरीर से युद्ध करने का प्रयास करना चाहिए। इस युद्ध के लिए चारित्र आत्मा, शुभ योग आत्मा, सम्यक् दर्शन आत्मा का सहयोग लेना होता है। आत्मयुद्ध मानों अहिंसा से युक्त है। उन्होंने सम्मेलन के संभागियों को शक्ति का सदुपयोग करने की प्रेरणा दी। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश डागा, महामंत्री अमित नाहटा ने भी विचार व्यक्त किए।
Published on:
30 Aug 2025 10:37 pm
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