1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

द्वारका जगतमंदिर मेें हुआ कुछ ऐसा लोग हो गए भावुक…?

dwarka temple, cows, lumpi virus, gujarat news; गायों को दर्शन देने के लिए आधी रात खोले जगत मंदिर के द्वार

2 min read
Google source verification
द्वारका जगतमंदिर मेें हुआ कुछ ऐसा लोग हो गए भावुक...?

द्वारका जगतमंदिर मेें हुआ कुछ ऐसा लोग हो गए भावुक...?

जामनगर. देवभूमि द्वारका स्थित जगत मंदिर में ऐसा पहली बार हुआ कि रात में 25 गायों के लिए मंदिर के द्वार खोल गए। कच्छ में रापर के पास रेगिस्तान मेडक बेट की गायों ने 450 किमी की पैदल यात्रा करने के बाद मंदिर परिसर में प्रवेश कर द्वारकाधीश के दर्शन किए।
द्वारका जगतमंदिर भक्तों की आस्था का केन्द्र है। इतिहास में पहली बार इस द्वारका मंदिर में कुछ ऐसा हुआ है कि लोग सोचते रह गए। क्योंकि अभी तक लोग पैदल चलकर द्वारका आते हैं और द्वारकाधीश को नमन करते हैं ऐसा आपने जरूर सुना होगा लेकिन पहली बार 25 गाय 450 किलोमीटर की पदयात्रा करके द्वारका जगत मंदिर पहुंचीं और द्वारका मंदिर के अंदर परिक्रमा की।

पशुपालक ने मानी थी मन्नत

गायों में लम्पी वायरस की शुरुआत कच्छ से हुई थी और एक-एक करके गायें मर रही थीं। पशुपालक भी अपने पशुधन को बचने की लिए चिंतित थे। उस समय कच्छ के रापर तालुका में मेडक बेट के महादेवभाई देसाई नाम के एक पशुपालक ने अपनी गायों को को इस वायरस से बचाने के लिए द्वारकाधीश से मन्नत मांगी की थी कि 'हे कालिया ठाकर, मेरी गायों को लम्पी से बचा लेना में उन्हें पैदल लेकर तुम्हारे दर्शन करवाने के लिए लेकर आऊंगा।
मावजीभाई की मन्नत फली और उनकी 25 गायें लम्पी से बच गईं। एक भी गाय की मृत्यु नहीं हुई और दूसरी गायों में यह बीमारी न फैली। इसलिए अपनी मन्नत को पूरा करने के लिए वे कच्छ से 450 किलोमीटर पैदल चलकर द्वारका मंदिर में गौमाता को दर्शन करवाने के लिए लेके आये।
गायों को दर्शन देने के लिए आधी रात को जगत मंदिर के द्वार खोल दिए गए
कच्छ से 450 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद वे द्वारका पहुंचे, लेकिन फिर सवाल था कि गायो को दिन में दर्शन कैसे कराएं, क्योंकि दिन में द्वारकाधीश के दर्शन करने वाले भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इतनी गायों को अंदर कैसे ले जाए उसके बाद प्रशासन की ओर से विशेष रूप से मंजूरी देकर गायों को दर्शन के लिए रात में जगत मंदिर के गेट खोल दिए । द्वारका मंदिर में ऐसा पहली बार हुआ कि आधी रात को गायों के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए और 450 किमी चलकर 25 गायों ने मंदिर में प्रवेश किया और भगवान द्वारकाधीश के दर्शन किए। देर रात हुई इस घटना को देखकर जगतमंदिर में हर कोई स्तब्ध रह गया और कृष्ण का गाय के साथ प्रेम प्रसंग याद आ गया।

25 गायों ने जगत मंदिर में परिक्रमा की

मावजीभाई 25 गायों और 5 ग्वालों के साथ 17 दिन की दूरी तय कर द्वारका मंदिर पहुंचे। मंदिर के प्रशासन और स्थानीय लोगों ने भगवान द्वारकाधीश के आशीर्वाद के रूप में महादेवभाई और उनके साथ आए गौसेवकों को सम्मानित किया।

यह दृश्य देखकर द्वारकानगरी भावुक हो उठी
भगवान द्वारकाधीश को ग्वाल कहा जाता है, क्योंकि भगवान कृष्ण गायों के बहुत प्रिय थे और हमेशा गायों के बीच देखे जाते थे । स्वाभाविक है कि गायों में लम्पी वायरस नामक भयानक रोग होने पर भगवान श्री कृष्ण भी निराश हुवे होंगे। फिर हाल ही में हुई इस घटना ने पूरे द्वारका शहर को भावुक कर दिया है।