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स्थापत्यकला की उत्कृष्ट विरासत ‘भुज की छतरी’

भूकम्प में हो गया था कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त

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Bhuj's chhatari

Bhuj's chhatari

भुज. भुज की पहचान अब भले ही धीरे-धीरे विकसित हो रहे नगर के रूप में स्थापित होने जा रही है, लेकिन आज का भुज एक जमाने में राजाशाही युग का मुख्य केन्द्र था। शहर में आज भी राजाशाही युग की इमारतें जैसे की आयना महल, प्रागमहल देखने को मिलते हैं, लेकिन हमीरसर तालाब के निकट स्थित विभिन्न छतरियां (गुंबद जैसे आकार की) तो आज भी राजाशाही युग एवं पुराणकाल की झांकी दिखाती हैं।
हमीरसर तालाब क्षेत्र में करीब ५ एकड़ में खड़ी यह छतरियां स्थापत्यकला की उत्कृष्ट विरासत मानी जाती हैं और जब कच्छ में राजाशाही शासन था, तब तत्कालीन राजपरिवार की ओर से इन छतरियों का निर्माण कराया गया था। छतरियों का निरीक्षण करने पर पता चलता है कि यह छतरियां शायद तत्कालीन राजाशाही परिवार के सदस्यों को घूमने-फिरने एवं शहर के शोभा बढ़ाने के लिए निर्माण कराया गया हो।


नक्काशी में सूर्य, हाथी व राजाओं के चित्र
इन छतरियों के निर्माण कार्य में राजाशाही युग की भी झांकी देखने को मिलती है। पत्थरों पर की गई नक्काशी में सूर्य, हाथी, राजाा एवं सिपाही आदि के दृश्य दिखाई देते हैं। छतरियों को निर्माण में पीले पत्थर का उपयोग किया गया है।
फिल्म'हम दिल दे चुके सनम' का दृश्य यहां फिल्माया
कच्छ राज्य राजाशाही से लोकशाही सरकार मे विलिन हुई तो इस स्थापत्य स्थल को पुरातत्व विभाग ने संभाल लिया है। तब से यह स्थल केन्द्र सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन हैं। भुज के लोग इस स्थल को घूमने व फोटोग्राफी के लिए अधिक पसंद करते हैं। इतना ही नहीं, अपितु इस प्रसिद्ध स्थल पर फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' का एक दृश्य यहां फिल्माया गया था। वर्ष २००१ में आए भूकम्प के दौरान इस स्थल का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। अब पुरातत्व विभाग की ओर से क्षतिग्रस्त स्थल का मरम्मत कार्य किया जा रहा है।
-नरेश अंताणी-पुरातत्वविद् एवं इतिहासकार