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Gandhi Jayanti 2023: गुजरात में ध्यान और समर्पण के साथ मनाई गई गांधी जयंती

Gandhi Jayanti 2023: गांधी जयंती के खास अवसर पर गुजरात में आज पोरबंदर के कीर्ति मंदिर और साबरमती आश्रम (Sabarmati Ashram) सहित कई जगहों पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। Gandhi Jayanti 2023 celebrated in Gujarat, Chief Minister Bhupendra Patel paid tribute to Mahatma Gandhi at Porbandar

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गुजरात में ध्यान और समर्पण के साथ मनाई गई गांधी जयंती

Gandhi Jayanti 2023: गुजरात में ध्यान और समर्पण के साथ मनाई गई गांधी जयंती

Gandhi Jayanti 2023: हर साल देशभर में 2 अक्टूबर यानि आज के दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी (Mahatma Gandhi) की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह उनकी 155वीं जयंती है। गांधीजी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता थे, जिन्होंने आजादी की जंग में भारतीयों को एक किया और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को स्वतंत्रता दिलाने में अहम योगदान दिया।

आज के इस खास मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके सम्मान में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इसी कड़ी में अहमदाबाद के साबरमती आश्रम (Sabarmati Ashram) के हृदय कुंज और पोरबंदर स्थित कीर्ति मंदिर में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। 155वीं गांधी जयंती पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल (CM Bhupendra Patel) ने दी बापू को श्रद्धांजलि। पोरबंदर स्थित कीर्ति मंदिर में आयोजित प्रार्थना सभा में उनके साथ सांसद और मंत्री भी रहे उपस्थित।

उन्होंने गांधीजी के जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने अहिंसा, सत्य, प्रेम और दया जैसे मूल्यों को अपने जीवन में उतारकर दिखाया। सभा में उपस्थित सभी लोगों ने गांधीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लिया।

साबरमति आश्रम के बारे में भी जाने

साबरमति आश्रम का गांधीजी (Mahatma Gandhi) के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान था। साबरमती आश्रम (जिसे हरिजन आश्रम भी कहा जाता है) 1917 से 1930 तक मोहनदास गांधी का घर था । यह भारत में उनके द्वारा स्थापित पहला आश्रम था। साबरमती आश्रम(Sabarmati Ashram) ही वो जगह थी जहां से महात्मा गांधी ने सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की थी। गांधीजी ने स्वतंत्रता और साथ ही साथ समाज के उत्थान की सभी प्रमुख गतिविधियों का संचालन इसी आश्रम से किया था।

आज यह आश्रम प्रेरणा और मार्गदर्शन स्त्रोत के रूप में सेवा करता है और गांधीजी के जीवन के मिशन के स्मारक और उनके संघर्ष का साक्ष्य बन गया है।

हृदय कुंज क्या है?

यह आश्रम में गांधीजी का घर था। काकासाहेब कालेलकर ने इसका नाम हृदय कुंज रखा। गांधीजी और कस्तूरबा यहां 1918 से 1930 तक रहे। यहां उनकी मुलाकात राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों से हुई। उन्होंने 1930 में इस प्रतिज्ञा के साथ आश्रम छोड़ दिया - "जब तक भारत स्वतंत्र नहीं हो जाता तब तक इस आश्रम में वापस नहीं लौटेंगे"। इसके अंदर 6 कमरे हैं।

इसलिए आज के इस खास मौके Gandhi Jayanti 2023 पर उनके जीवन काल से जुड़ी इस महत्वपूर्ण जगह पर सभा व विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।