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राखी के धागे से सीमा तक पहुंचा बहनों का स्नेह, जवानों के लिए भेजीं 68 हजार राखियां

अहमदाबाद. वडोदरा. रक्षाबंधन पर बहन की राखी भाई की कलाई तक पहुंचे, यह तो आम बात है, लेकिन जब वही राखी सरहद पर तैनात किसी अनजान जवान की कलाई पर बंधती है तो रिश्ता खून से नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ जाता है। वडोदरा के सेवानिवृत्त शिक्षक एवं लेखक संजय बच्छाव की पहल ‘रक्षाबंधन विथ इंडियन आर्मी’ के तहत इस साल देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए 68 हजार राखियां भेजी गई हैं। सावन के दूसरे सोमवार को भारतीय डाक के माध्यम से वडोदरा से ये राखियां रवाना की गईं।
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sisters' affection reaches the borders via rakhi threads 68000 rakhi sent for soldiers

वडोदरा के दांडिया बाजार िस्थत प्रो. माणिकराव के श्री जुम्मादादा व्यायाम मंदिर में राखियों की पैकिंग करते हुए।

राजेश भटनागर

अहमदाबाद. वडोदरा. रक्षाबंधन पर बहन की राखी भाई की कलाई तक पहुंचे, यह तो आम बात है, लेकिन जब वही राखी सरहद पर तैनात किसी अनजान जवान की कलाई पर बंधती है तो रिश्ता खून से नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ जाता है। वडोदरा के सेवानिवृत्त शिक्षक एवं लेखक संजय बच्छाव की पहल ‘रक्षाबंधन विथ इंडियन आर्मी’ के तहत इस साल देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए 68 हजार राखियां भेजी गई हैं। सावन के दूसरे सोमवार को भारतीय डाक के माध्यम से वडोदरा से ये राखियां रवाना की गईं।
बच्छाव ने 2015 में महज 75 राखियों से इस अभियान की शुरुआत की थी। इस बार राखियों की संख्या बढ़कर 68 हजार हो गई। इनमें करीब 50 हजार राखियां दिव्यांग, दृष्टिबाधित और स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों ने हाथ से बनाकर भेजी हैं। इस बार करीब दो हजार पत्र और इससे अधिक ग्रीटिंग कार्ड भी जवानों के लिए भेजे गए हैं।

15 देशों से आया स्नेह

इस वर्ष अमरीका, कनाडा, दुबई, रूस, लंदन और ऑस्ट्रेलिया सहित करीब 15 देशों से राखियां आई हैं। पहली बार कनाडा से एनआरआई बहनों ने करीब 150 राखियां बनाकर भेजीं। उधर गुजरात के साथ-साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर सहित करीब 15 राज्यों की बहनों और विद्यार्थियों ने भी राखियां भेजीं। झारखंड से भी पहली बार राखियां पहुंचीं। इसमें इनरव्हील क्लब का विशेष योगदान रहा।

आदिवासी बच्चों ने भी भेजा प्यार

गुजरात के सीमावर्ती दाहोद जिले के सात सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने तरापो फाउंडेशन के प्रशिक्षण के बाद चार हजार से अधिक राखियां बनाईं। महारुद्र हनुमान संस्थान के प्रशिक्षण से सीमावर्ती आदिवासी क्षेत्रों के 11 सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने पांच हजार से अधिक राखियां तैयार कीं। वडोदरा के रीच-सेंटर फॉर ऑटिज्म के 28 विद्यार्थियों ने भी 200 राखियां बनाईं।

राखी के साथ संदेश भी

हर राखी के साथ बहन का नाम, मोबाइल नंबर, संदेश और ग्रीटिंग कार्ड भी भेजा जाता है। कई जवान राखी मिलने के बाद संबंधित बहनों को फोन कर आभार जताते हैं। जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सियाचीन, भारत-बांग्लादेश और भारत-चीन सीमा सहित देश की विभिन्न सीमाओं पर ये राखियां पहुंचाई गई हैं। बर्फीली ठंड, तपती धूप और कठिन परिस्थितियों में डटे जवानों के लिए ये राखियां महज धागे नहीं, बल्कि देशवासियों के प्यार, सम्मान और विश्वास का एहसास हैं।