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Ahmedabad: एनआइडी ने डिजाइन की राष्ट्रपति भवन के ‘एट होम’ समारोह की विशेष आमंत्रण किट

-लगातार चौथी बार संस्थान ने तैयार की किट, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गोवा की लोककला और पर्यावरण संरक्षण का है संदेश
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राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान ने डिजाइन की राष्ट्रपति भवन के एट होम कार्यक्रम की विशेष आमंत्रण किट।

Ahmedabad. देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले ‘एट होम’ कार्यक्रम की विशेष आमंत्रण किट इस बार भी शहर स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआइडी) ने तैयार की है। किट में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गोवा की पारंपरिक हस्तकलाओं का अनूठा संगम देखने को मिलता है। करीब 130 कारीगरों सहित 220 से लोगों की भागीदारी से तैयार यह किट भारतीय कला, शिल्प की जीवंत तस्वीर पेश करती है। 650 से ज्यादा किट तैयार की गई हैं।

एनआइडी-अहमदाबाद के निदेशक डॉ. अशोक मोंडल ने सोमवार को बताया कि पिछले दो वर्षों में लगातार यह चौथी बार है जब राष्ट्रपति भवन के ‘एट होम’ कार्यक्रम की औपचारिक आमंत्रण किट तैयार करने की जिम्मेदारी संस्थान को मिली।

चार राज्यों में कलाकारों ने की तैयार

मोंडल ने बताया कि पिछले करीब चार महीनों में संस्थान के अहमदाबाद, गांधीनगर, बेंगलुरू परिसर के प्राध्यापकों की टीमों ने छत्तीसगढ़, गोवा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र का व्यापक दौरा कर विभिन्न कलाकार समुदायों से संवाद किया। राष्ट्रपति भवन की टीम के साथ लगातार चर्चा और कई चरणों की प्रक्रिया के बाद किट में शामिल कलाकृतियों का स्वरूप तय किया हुआ। इसके बाद 130 कलाकारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में घर पर ही उनकी कलाकृतियां तैयार कीं, जिन्हें बाद में एनआइडी-अहमदाबाद में एकीकृत किया गया।

नक्सलवाद से उबरे बस्तर के कारीगरों में दिखा उत्साह

एनआइडी निदेशक के मुताबिक इस किट में यूं तो चार राज्यों की हस्तकला है, लेकिन सबसे अहम कुछ समय पहले ही नक्सलवाद से उबरे छत्तीसगढ़ के बस्तर की लौह-शिल्प कला है। वहां की प्रसिद्ध ढोकरा कला (लौह-शिल्प कला) के 50 जानकार कारीगरों ने बस्तर में ही डिस्प्ले फ्रेम और घंटी तैयार की है, जो देवकोट वनक्षेत्र के संरक्षण का संदेश देते हैं। गोवा के कलाकारों ने हाथ से चित्रित अज़ुलेजो टाइल में खाजान भूमि और समुद्र तटीय जलीय पर्यावरण को दर्शाया है। मध्यप्रदेश की भील कला के जरिए स्थानीय बीज संरक्षण की परंपरा को प्रस्तुत किया गया है। धार जिले के बाग प्रिंट कपड़े से फैब्रिक एन्वेलप तैयार किया है। महाराष्ट्र की वारली चित्रकला में छत्रपति संभाजीनगर के खाम नदी पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट को दर्शाया गया है। वहीं आमंत्रण के बाहरी कवर पर कोंकण क्षेत्र की कावी कला से प्रेरित डिजाइन है।

महेश्वर शैली का हाथ से बुना विशेष स्टॉल

किट में मध्यप्रदेश की महेश्वर शैली में हाथ से बुनकर तैयार किया गया विशेष स्टॉल भी शामिल है। इसमें चारों राज्यों की बुनाई परंपराओं के क्षेत्रीय महत्व को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।