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राजगीरी करने वाले की बेटी ने सीएस एक्जीक्यूटिव में पाई देश में पांचवीं रैंक

बोली लगन व कड़ी मेहनत से मिली सफलता, सीएस बनकर छुड़ाना है पिता का काम, जरूरतमंदों की मदद की भी चाहत

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अहमदाबाद. राजगीर (चिनाई-कडिय़ा) का काम करने वाले अनिलभाई प्रजापति की बेटी ध्वनि ने कंपनी सेक्रेटरी के एक्जीक्यूटिव प्रोग्राम में ७०० में से ४६१ अंक पाकर देश में पांचवीं रैंक पाई है। वह अहमदाबाद में अव्वल रही। सीएस के फाउंडेशन प्रोग्राम में दिसंबर २०१६ में भी वह देश में ११वें और अहमदाबाद में पहले स्थान पर रह चुकी है।
ध्वनि बताती है कि लगन और कड़ी मेहनत के बूते उसे यह सफलता मिली है। वह आगे चलकर कंपनी सेक्रेटरी बनना चाहती है। सीएस बनने के बाद पिता को राजगीर का काम नहीं करने देगी। वह अपने जैसे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन होशियार बच्चों की शिक्षा में यथासंभव मदद भी करेगी। मां इलाबेन सिलाई का काम करती हैं। एक ट्रस्ट की मदद से कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई पूरी कर रही ध्वनि बताती है कि वह दिन में चार से पांच घंटे क्लासेज जाने के बाद पढ़ाई करती है। फोटोग्राफी का शौक है, लेकिन पढ़ाई के चलते ध्यान नहीं दे रही। सफलता के लिए वह यही टिप्स देना चाहती है कि संस्थान के मॉड्यूल और पुराने पेपरों के जरिए तैयारी करो। नियमित पढ़ाई करो। उसका रिवीजन भी नियमित करो। किसी भी विषय का बैकलॉग मत रहने दो। किस्मत से ज्यादा कड़ी मेहनत लोगों को ज्यादा काम आती है।

मॉड्यूल और पुराने पेपरों के जरिए करो तैयारी: अमरजीत कौर
सीएस प्रोफेशनल में देश में १७वीं रैंक और अहमदाबाद में पहला स्थान पाने वाली अमरजीत कौर बताती हैं कि सफलता के लिए जरूरी है कि संस्थान के मॉड्यूल और पुराने पेपरों को हल करके तैयारी की जाए। नियमित पढ़ाई के साथ नियमित रिवीजन भी जरूरी है। २०१५ में फाउंडेशन में भी वह देश में ८वीं रैंक और अहमदाबाद में पहला स्थान पा चुकी है। पिता व्यवसायी हैं और मां गृहिणी। थियरी में रुचि होने के चलते सीए की जगह सीएस बनना चुना।

सीए के बाद सीएस बने विशाल
दो साल पहले २०१५ में सीए बन चुके विशाल डेडिया ने रविवार को घोषित हुए सीएस प्रोफेशनल के परिणाम में देश में २३वीं रैंक पाकर सीएस की भी डिग्री प्राप्त कर ली। विशेषता यह है कि ट्यूशन के बिना और जॉब करते हुए उन्होंने सीएस की पढ़ाई की। इन दिनों वह बैंग्लौर में जॉब कर रहे हैं। पिता की किराणा की दुकान है। एक्जीक्यूटिव में अहमदाबाद में चेप्टर में पहले स्थान पर रह चुके हैं। सीए में आईपीसीसी में देश में ४०वें स्थान पर रह चुके हैं।

दिल लगाकर करो पढ़ाई: नम्रता
राजस्थान के जोधपुर की मूल निवासी नम्रता जैन ने सीएस प्रोफेशनल में अहमदाबाद चेप्टर में तीसरा स्थान पाया है। वह बताती हैं कि घंटों को तय करके नहीं बल्कि दिल लगाकर जब तक मन लगे तब तक पढ़ाई करनी चाहिए। नियमित, दृढ़ इच्छाशक्ति से तैयारी करें। पुराने पेपर जरूर हल करें ताकि पता चले कि प्रश्न पत्र में क्या और कैसे प्रश्न पूछे जाते हैं। बड़ी बहन ने सीएस की तैयारी की थी, लेकिन सफल नहीं हो पाई। उसकी प्रेरणा से ही उसने तैयारी की है। पिता व्यवसायी हैं।

ट्यूशन बिना भी सफलता संभव: अर्पित
एक्जीक्यूटवि में अहमदाबाद में दूसरा स्थान पाने वाले अर्पित चौहान बताते हंै कि ट्यूशन के बिना भी सफल होना संभव है। जरूरत है कि आप लगन से पढ़ाई करो। उन्होंने ट्यूशन के बिना घर पर ही इंस्टीट्यूट की बुक और रेफरेंस बुक से तैयारी की है। वह साथ में सीए की भी पढ़ाई कर रहे हैं। बहन अमी ने नवंबर-२०१७ में ही सीए की परीक्षा उत्तीर्ण की है। उसका भी अच्छा सहयोग पढ़ाई में मिलता है।

दो महीने की कड़ी मेहनत: दीपक
एक्जीक्यूटिव में अहमदाबाद चेप्टर में तीसरे स्थान पर रहे दीपक शर्मा बताते हैं कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह सफल होंगे। क्योंकि परीक्षा से चंद दिन पहले ही एक्सीडेंट हो गया था। पेपर भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं गया था। दो महीने उन्होंने सोशल मीडिया से दूर रहकर सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दिया। नियमित पढ़ाई की और मॉड्यूल के जरिए तैयारी की। सीए करना था, लेकिन सीए में समय ज्यादा लगने के चलते सीएस बनना पसंद किया।