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राखी से पहले नेत्रदान से अब भाई की जिंदगी में भी लौटी आंखों रोशनी

रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है। इस बार जूनागढ़ के मांगरोल के एक परिवार के लिए यह पर्व कुछ ज्यादा ही भावुक है।
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national Eye donation fortnight

एआइ फोटो।

ahmedabad news : 11 साल पहले जिस नेत्रदान से उनकी एक साल की बेटी की आंखों में दुनिया देखने की रोशनी आई थी, उसी उम्मीद के सहारे अब ढाई साल के बेटे की आंख का भी कॉर्निया ट्रांसप्लांट हुआ है। बहन आज 12 साल की है और छठी कक्षा में पढ़ रही है, जबकि छोटे भाई की एक आंख में करीब एक माह पहले ट्रांसप्लांट के बाद अब उसे थोड़ा-थोड़ा दिखाई देने लगा है।

एक साल की उम्र में बदली बेटी की दुनिया

बेटी के जन्म के बाद माता-पिता की खुशियां उसकी आंखों की रोशनी को लेकर चिंता में बदल गई थीं। वह जन्म से ही दृष्टिहीन थी। कई अस्पतालों में इलाज के प्रयास के बाद परिवार अहमदाबाद के सरकारी एम एंड जे इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी पहुंचा। यहां नेत्रदान से मिली कॉर्निया का प्रत्यारोपण किया गया। एक साल की उम्र में हुए ट्रांसप्लांट के बाद बच्ची धीरे-धीरे चीजों को देखने लगी। आज वह चश्मे की मदद से पढ़ाई कर रही है और सामान्य जीवन जी रही है। उसे स्कूल जाते और पढ़ते देखकर माता-पिता को लगा कि बेटी का जीवन बदल गया।

फिर बेटे के जन्म से सामने आई वही चुनौती

बेटी के जन्म के करीब 9 वर्ष बाद परिवार में बेटे का जन्म हुआ। वह भी जन्म से ही देखने में असमर्थ था। इस बार चिंता के साथ माता-पिता के पास एक उम्मीद भी थी-बेटी के इलाज की सफलता। वे बेटे को एम एंड जे इंस्टीट्यूट लेकर पहुंचे। करीब एक माह पहले ढाई साल की उम्र में उसकी एक आंख का कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया। पिता के अनुसार अब बच्चे को थोड़ा-थोड़ा दिखाई देने लगा है। दूसरी आंख का प्रत्यारोपण भी आगामी दिनों में किया जाएगा।

‘किसी ने आंखें दान नहीं की होतीं तो...’

बच्चों के पिता बताते हैं कि बेटी ने जब पहली बार चीजों को देखना शुरू किया था, उस खुशी को शब्दों में बताना मुश्किल था। अब बेटे की आंख में रोशनी की उम्मीद देखकर वही खुशी फिर लौट रही है। उनका कहना है कि अगर किसी अनजान व्यक्ति ने नेत्रदान का फैसला नहीं किया होता तो शायद उनके दोनों बच्चों के जीवन में यह उजाला नहीं आ पाता। वे लोगों से नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील करते हैं। दोनों बच्चों के मुफ्त कॉर्निया प्रत्यारोपण डॉ. जागृति जाडेजा के नेतृत्व में किए गए। अस्पताल के आरएमओ डॉ. उमंग मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में नियमित रूप से कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए जाते हैं और आई बैंक की सुविधा भी उपलब्ध है।

एक नेत्रदान, किसी की दुनिया रोशन

राष्ट्रीय चक्षुदान पखवाड़ा मंगलवार से शुरू हो गया। इसके तहत नेत्रदान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम होंगे। डॉ. मिश्रा के अनुसार कॉर्निया की खराबी से दृष्टि गंवाने वाले मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट उम्मीद की किरण बन सकता है, हालांकि हर प्रकार की दृष्टिहीनता में यह संभव नहीं है। इस रक्षाबंधन पर यह परिवार भाई-बहन के रिश्ते के साथ उन अनजान नेत्रदाताओं को भी याद करेगा, जिनकी आंखों ने 11 साल के अंतराल में उनके दोनों बच्चों की दुनिया में उजाले की उम्मीद जगाई।