
अहमदाबाद. राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) की वरिष्ठ प्रोफेसर शिल्पा दास ने कहा कि स्टार्टअप के मामले में भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा हब बन गया है, लेकिन यहां केवल नौ फीसदी स्टार्टअप की संस्थापक महिलाएं हैं। इस वर्ष दी गई इक्विटी फंङ्क्षडग में सिर्फ दो फीसदी और वेंचर फडिंग में सिर्फ तीन प्रतिशत फडिंग महिलाओं की मालिकी वाले स्टार्टअप को मिली है। यह भारत में स्टार्टअप शुरू करने के लिए देश की संस्कृति व माहौल में महिलाओं की चुनौती, असमानता और फंड पाने में मर्यादा को दर्शाता है।
दास विश्व बौद्धिक संपदा (आईपी) दिवस पर फिक्की की ओर से 'पावरिंग चेंज: वुमन इन इनोवेशन एंड क्रिएटिविटी' विषय पर आयोजित समूह चर्चा में कहा कि महिलाओं के कम संख्या में उद्यमी बनने की कई वजहें हैं। इसमें जागरुकता की कमी के अलावा सामाजिक, आर्थिक कारण और मानसिकता शामिल है। जब तक इसमें बदलाव नहीं होता तब तक बेहतर परिणाम नहीं मिलेंगे।
रॉसलिन्ड फ्रेंकलिन ने पेटेन्ट कराया होता तो दूसरे को न मिलता नोबल पुरस्कार!
उन्होंने आईपी और पेटेन्ट की महत्ता दर्शाते हुए कहा कि डीएनए की संरचना मॉडल की खोज के क्षेत्र में महिला वैज्ञानिक रॉसलिन्ड फ्रेंकलिन की अहम मेहनत थी। उनके डाटा का उपयोग करके वॉटसन एवं क्रिक ने रॉसलिन्ड की मौत के बाद डीएनए मॉडल की खोज के लिए नोबल पुरस्कार जीता। लेकिन यदि रॉसलिन्ड ने अपनी खोज और मेहनत का पेटेन्ट करवाया होता तो उनकी जगह किसी दूसरे को नोबल पुरस्कार नहीं मिलता। इसलिए यह भी जरूरी है कि कोई भी व्यक्ति जो मेहनत करता है उसका पेटेन्ट भी कराना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चीन में समान संख्या में महिला एवं पुरुष पेटेन्ट फाइल करते हैं, जबकि भारत में यह अंतर काफी बड़ा है। इसके लिए जरूरी है कि देश के विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था में ही पेटेन्ट, बौद्धिक संपदा से जुड़ी जागरुकता को शामिल करना होगा जैसा चीन में है।
इसरो की वैज्ञानिक अरुंधति मिश्रा रे ने कहा कि महिलाओं को आगे लाने के लिए हमें पारिवारिक वातावरण बदलने की जरूरत है जिसमें महिला व पुरुष को एक समान अधिकार हों। आईआईएम-ए की प्रोफेसर निहारिका वोरा ने कहा कि सृजनात्मकता और इनोवेशन एक दूसरे से जुड़े हैं। लेखिका रक्षा भराडिया ने कहा कि महिलाएं जुड़ाव बनाने में माहिर होती हैं। इस मौके पर वकील जतिन त्रिवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
Published on:
26 Apr 2018 11:51 pm
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