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संत हमारे समाज के पथ-प्रदर्शक : प्रो. दूबे

सीयूजी में भारतीय संत साहित्य अध्ययन केंद्र की स्थापना वडोदरा. गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजी) में बुधवार को भारतीय संत साहित्य अध्ययन केंद्र की स्थापना की गई।केंद्र का उद्घाटन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे ने कहा कि संत हमारे समाज के पथ-प्रदर्शक हैं। संतों का आचरण अनादिकाल से मानव समाज के कल्याण में […]

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सीयूजी में भारतीय संत साहित्य अध्ययन केंद्र की स्थापना

वडोदरा. गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजी) में बुधवार को भारतीय संत साहित्य अध्ययन केंद्र की स्थापना की गई।
केंद्र का उद्घाटन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे ने कहा कि संत हमारे समाज के पथ-प्रदर्शक हैं। संतों का आचरण अनादिकाल से मानव समाज के कल्याण में सहायक रहा है। हमारे वेदों, उपनिषदों, संहिताओं, पुराणों सहित सम्पूर्ण साहित्य में संतों की महिमा का वर्णन है।
उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव, कबीर, नरसी मेहता, मीराबाई, दयानंद सरस्वती, रविदास, तुलसीदास, सूरदास, शंकराचार्य एवं संत दादू दयाल जैसे अनेक संतों ने मानव समाज को मार्गदर्शन प्रदान किया है।
इस अवसर पर महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के गुजराती विभागाध्यक्ष प्रो. भरत पंड्या मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि गुजरात में संतों की कृपा का प्रभाव आज भी स्पष्ट रूप से अनुभव किया जा सकता है और यह राज्य अपनी समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। संतों ने भक्ति और प्रेम के मार्ग पर चलने के लिए लोगों को प्रेरित किया है।
केंद्र के अध्यक्ष प्रो. राजेश मकवाना ने बताया कि केंद्र की ओर से विभिन्न संतों के हस्तलिखित ग्रंथों, धार्मिक एवं आध्यात्मिक साहित्यों को संरक्षित करने के साथ-साथ उनके जीवन संदेशों और समाजोपयोगी कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। गौरतलब है कि केंद्र में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य डॉ. मिलिंद सोलंकी, डॉ. पुलकेशी जानी एवं डॉ. प्रेमलता देवी सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं।