
GCRI : कंधे की हड्डी को अलग-थलग कर किया कैंसर मुक्त
अहमदाबाद. कैंसर की जकडऩ में आए महिला के कंधे को आखिर चिकित्सकों ने बचा लिया। दरअसल कंधे की हड्डी (स्कैपुला) को कैंसर ने इस कदर जकड़ लिया कि महिला को अपना हाथ गंवाना पड़ सकता था। अहमदाबाद सिविल अस्पताल परिसर स्थित गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआई) के चिकित्सकों की सूझबूझ से हाथ को बचाया जा सका। इसके लिए एक्सट्रोकोर्पोरियल रेडियोथेरेपी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। हाल में कंधे की मूवमेंट भी अच्छी तरह से हो रही है।
45 वर्षीय एक महिला के कंधे में दर्द और गांठ की शिकायत होने पर जांच करवाई गई। जिसमें कंधे की हड्डी में कोंड्रोसारकोमा कैंसर की पुष्टि हुई थी। यह गंभीर प्रकार का कैंसर होता है। इसके उपचार के लिए महिला को पिछले दिनों जीसीआरआई अर्थात कैंसर अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने महिला के हाथ को बचाने के लिए एक्सट्रोकोर्पोरियल रेडियोथेरेपी तकनीक का उपयोग किया। कैंसर अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अभिजीत सालुंके ने बताया कि महिला के कंधे की हड्डी पूरी तरह से कैंसर की गिरफ्त में आ गई थी। ऐसे में विकल्प के रूप में या तो महिला के पूरे हाथ (कंधे समेत) को काटना पड़ता या फिर कंधे का कृत्रिम जोड़ डाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि कृत्रिम जोड़ की कीमत लगभग पांच लाख रुपए होती है। इसके बावजूद वह ठीक तरह से काम करता या नहीं इसकी भी कोई गारन्टी नहीं थी। ऐसे में चिकित्सकों ने एक्सट्रोकोर्पोरियल रेडियोथेरेपी तकनीक से ऑपरेशन करने का निर्णय किया। तीन घंटे चले ऑपरेशन से महिला के न सिर्फ हाथ को बचाया जा सका बल्कि उसके कंधे की मूवमेंट भी पूरी तरह से ठीक से होने लगी है। एक्सट्रोकोर्पोरियल रेडियोथेरेपी तकनीक से यूं तो पूर्व मेें भी कई ऑपरेशन किए जा चुके हैं लेकिन कंधे की हड्डी में संभवत: यह ऑपरेशन पहली बार किया गया है। ऑपरेशन करने वालों की टीम में डॉ. अभिजीत के अलावा मयूर कामानी तथा प्लास्टिक सर्जन डॉ. नीरव महाराजा मौजूद रहे।
ऐसे किया जटिल ऑपरेशन
महिला की कैंसर ग्रस्त हड्डी (स्कैपुला) को काटकर शरीर से अलग-थलग किया गया। इसके बाद उसे 50 ग्रे रेडियोथेरेपी के माध्यम से कैंसर मुक्त किया गया। लगभग 30 मिनट तक थैरेपी देने के बाद हड्डी को स्क्रू और प्लेट के माध्यम से पुन: स्थापित कर दिया गया। इसके बाद प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से सभी मांसपेशियों ं को जोड़ा गया। जिससे कंधे के जोड़ का मूवमेंट सही से होने लगा। शरीर में रेडियोथेरेपी बहुत कम मात्रा में दी जाती है जबकि शरीर से अलग होने के बाद हड्डी को एक ही बार में कैंसर मुक्त किया जा सकता है।
डॉ. अभिजीत सालुंके, चिकित्सक ऑर्थोपेडिक विभाग, जीसीआरआई
नहीं गंवाना पड़ा हाथ
कोंड्रोसारकोमा जैसे जहरीले कैंसर से पीछा छुड़ाने के लिए महिला के हाथ को काटना पड़ सकता है। लेकिन इस थेरेपी से न सिर्फ हाथ को बचाया जा सका बल्कि कृत्रिम जॉइन्ट डालने की भी नौबत नहीं आई। महिला का हाथ लगभग सही तरह से काम कर रहा है जो बड़ी उपलब्धि है।
डॉ. शशांक पंड्या निदेशक, जीसीआरआई
Published on:
17 Oct 2020 09:44 pm
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