
Gujarat police साइबर अपराध से बचाने को सीआईडी क्राइम ने तैयार की 7 हजार स्वयंसवकों की फौज
नगेन्द्र सिंह
अहमदाबाद. सोशल मीडिया पर विवादास्पद धार्मिक पोस्ट करने के चलते हुई kishan bharwad किशन भरवाड़ की हत्या का मामला इन दिनों राज्य ही नहीं देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसी घटनाएं रोकने के लिए गुजरात पुलिस की cid crime सीआईडी क्राइम के साइबर सेल ने राज्य में 7 हजार स्वयंसेवकों की फौज तैयार की है। इसमें आईटी, साइबर जगत के प्रोफेसर से लेकर एथिकल हैकर तक शामिल हैं।
इन सभी की अलग-अलग भूमिकाएं हैं। इनमें कोई फेक न्यूज को चिन्हित करता है तो कोई साइबर जागरुकता के वीडियो, पोस्ट को लोगों तक पहुंचाने का काम करता है। साथ ही सोशल मीडिया पर नजर रखने के साथ-साथ कोई जांच में तो कोई ट्रेनिंग में मदद करता है। बोलने, समझाने में दक्ष लोगों के जरिए साइबर जागरुकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं।
साइबर क्राइम सेल ने शिक्षा विभाग के साथ संकलन कर राज्यभर में 9-12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को जागरुक करने के लिए अभियान भी छेड़ा है। इसके तहत प्रत्येक महीने के पहले बुधवार को ‘साइबर जागृति दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। गत 2 फरवरी से इसकी शुरुआत हुई है। केन्द्रीय गृहमंत्रालय की ओर से भी देश में बढ़ते साइबर अपराधों को नियंत्रित करने के लिए जागरुकता पर जोर देने का निर्देश दिया गया है जिसे देखते हुए गुजरात में सीआईडी क्राइम को नोडल एजेंसी बनाया है।
टाले जा सकते हैं 98 फीसदी साइबर अपराध
सीआईडी क्राइम में स्कूल-कॉलेज के युवाओं को जागरुक करने के लिए छेड़ेे गए इस अभियान की अगुवाई करने वाले साइबर सेल के पुलिस उपाधीक्षक बी एम टांक ने बताया कि सिर्फ 2 फीसदी साइबर अपराध मामलों में साइबर हैकर की ओर से व्यक्ति के मोबाइल फोन को हैक करने की आशंका रहती है। 98 फीसदी मामलों में वे संबंधित व्यक्ति के दिमाग को हैक करते है। उन्हें डराकर, ललचाकर, जल्द जानकारी देने का दबाव बनाकर, जल्द संबंधित प्रक्रिया कराने के चक्कर में व्यक्ति क्या कर रहा है उसका ध्यान भटकाकर अपराध को अंजाम देते हैं। ऐसे में यदि जागरुक हो और समझदारी से सोशल मीडिया का उपयोग करे तो वह ऐसे अपराधों से बच सकता है। इसलिए ज्यादा जोर जागरुकता पर दिया जा रहा है।
इस अभियान के पहले दिन ही राज्यभर की 105 स्कूलों में सीआईडी क्राइम की साइबर टीम ने 105 स्वयंसेवकों की मदद से 5500 विद्यार्थियों को जागरुक किया। राज्यभर में शिक्षा विभाग की मदद से विद्यार्थियों से गुगल फॉर्म भरवाए हैं। 1025 स्कूल इस अभियान में सीआईडी क्राइम साइबर सेल से जुड़े हैं।
50 प्रकार की मोडस ऑपरेंडी सेे बचने के सिखाए गुर
इस अभियान के तहत साइबर ठगी, ओटीपी ठगी, जॉब के नाम पर, कस्टमर केयर, मैट्रीमोनियल, क्रेडिट कार्ड लिमिट, एलआईसी, साइबर बुलिंग, लकी ड्रॉ, फेक आईडी जैसी ठगी सरीखे साइबर अपराध के लिए आरोपियों की ओर से अपनाए जाने वाली 50 प्रकार की मोडस ऑपरेंडी चिन्हित की हैं। इसे सीआईडी क्राइम अपने फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी लोगों को अवगत करा रही है।
युवतियों को दे रहे प्राइवेसी की समझ
सोशल मीडिया पर ब्लैकमेलिंग का ज्यादातर शिकार युवतियां होती हैं। ऐसे में युवतियों को समझाया जा रहा है कि वे किस प्रकार से खुद के सोशल मीडिया एकाउंट को हैंडल कर सकती हैं।
विवादास्पद धार्मिक टिप्पणी ना करने की सलाह
सोशल मीडिया पर लोग खुलकर अपने विचार व्यक्त करते हैं। लेकिन इस दौरान वे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत ना करने वाली पोस्ट social media post करने से बचें इसकी भी लोगों, युवाओं को सलाह दी जा रही है। बिना सोचे समझे किसी भी पोस्ट, वीडियो को फॉरवर्ड करने या फिर उस पर विश्वास करने, उसे लाइक करने से बचने को भी समझाया जा रहा है। जिससे ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। इसके लिए साइबर बुलिंग के नाम से एक टॉपिग इस अभियान में जोड़ा है।
-बी.एम.टांक, उपाधीक्षक, साइबर सेल, सीआईडी क्राइम, गुजरात
Published on:
03 Feb 2022 10:24 pm
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