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रील्स के जरिए 45 देशों के करोड़ों युवाओं तक पहुंच रही सोमनाथ महादेव की आस्था

अहमदाबाद. सावन के पहले सोमवार पर प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की आस्था का डिजिटल विस्तार भी नजर आ रहा है। मंदिर के श्रृंगार, आरती और भव्य स्वरूप के वीडियो व रील्स सोशल मीडिया के जरिए युवाओं समेत देश-दुनिया के श्रद्धालुओं तक पहुंच रहे हैं। मोबाइल स्क्रीन के माध्यम से भक्त घर बैठे सोमनाथ महादेव के दर्शन कर रहे हैं।
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अहमदाबाद

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Rajesh Bhatnagar

•

Updated: 2 Aug 2026, 11:58 PM IST

Faith in Somnath Mahadev is reaching millions of young people across 45 countries through Reels

सोमनाथ मंदिर

सावन का सत्कार : सावन के पहले सोमवार को देश-दुनिया के करोड़ों शिव भक्त घर बैठे कर सकेंगे महादेव के दर्शन

राजेश भटनागर

अहमदाबाद. सावन के पहले सोमवार पर प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की आस्था का डिजिटल विस्तार भी नजर आ रहा है। मंदिर के श्रृंगार, आरती और भव्य स्वरूप के वीडियो व रील्स सोशल मीडिया के जरिए युवाओं समेत देश-दुनिया के श्रद्धालुओं तक पहुंच रहे हैं। मोबाइल स्क्रीन के माध्यम से भक्त घर बैठे सोमनाथ महादेव के दर्शन कर रहे हैं।
भक्तों को घर बैठे सोमनाथ महादेव के दैनिक दर्शन का लाभ दिलाने के लिए वर्ष 2015 से सोशल मीडिया के माध्यम से ई-दर्शन की व्यवस्था शुरू की गई। सुबह, दोपहर और शाम के श्रृंगार दर्शन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जाते हैं। श्री सोमनाथ ट्रस्ट के सात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइट के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोमनाथ की डिजिटल पहुंच 45 से अधिक देशों तक है और करोड़ों श्रद्धालु सोशल मीडिया के माध्यम से महादेव के दर्शन का लाभ ले चुके हैं। खासकर वीडियो रील्स के माध्यम से मंदिर की भव्यता और दैनिक धार्मिक गतिविधियां युवाओं तक भी पहुंच रही हैं।

दर्शन से पूजा तक ऑनलाइन सुविधा

ई-दर्शन के साथ श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन दान-पूजा, प्रसाद और ठहरने की बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। सोमनाथ आने वाले यात्रियों के लिए सागर दर्शन अतिथि गृह, लीलावती अतिथि गृह सहित एसी और नॉन-एसी डोरमेटरी की व्यवस्था है। अगस्त 2022 से श्री सोमनाथ ट्रस्ट की ओर से भक्तों के लिए नि:शुल्क शुद्ध और सात्विक भोजन की व्यवस्था भी की गई है।
समुद्र दर्शन पथ और लाइट एंड साउंड शो
मंदिर के समीप 1.5 किलोमीटर लंबा समुद्र दर्शन पथ (वॉक-वे) भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। यहां वॉकिंग, साइ​किलिंग, बायनोक्यूलर, घुड़सवारी और ऊंट सवारी जैसी सुविधाएं हैं। मंदिर में लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से सोमनाथ के इतिहास और गौरवगाथा को भी प्रस्तुत किया जाता है।

आक्रमणों के बाद भी कायम रही आस्था

सोमनाथ मंदिर ने इतिहास में कई आक्रमणों और पुनर्निर्माणों का दौर देखा है। 1026 में महमूद गजनी के आक्रमण के बाद भी मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। राजा कुमारपाल और बाद में अहिल्याबाई होल्कर सहित अनेक शासकों ने इसके पुनर्निर्माण में योगदान दिया। आधुनिक काल में सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के भव्य पुनर्निर्माण की पहल की। प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की।

हजार साल की आस्था, 75 साल का पुनर्निर्माण

इस वर्ष सोमनाथ के लिए ऐतिहासिक महत्व का है। सोमनाथ की स्वाभिमान यात्रा के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं, वहीं 1951 में हुए मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। इसी ऐतिहासिक अवसर पर इस वर्ष सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है।

नागर शैली में बना मंदिर

नागर शैली में बने सोमनाथ मंदिर का सप्तभौम शिखर 155 फीट ऊंचा है। मंदिर का गौरव आज भी कायम है और डिजिटल दौर में इसकी आस्था नई पीढ़ी तक नए माध्यमों से पहुंच रही है।

ई-दर्शन आसान, लेकिन ये हैं अ़ड़चनें

सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने डिजिटल दर्शन में आधुनिकता अपनाई है, अब यात्रियों की भौतिक सुविधाओं में भी उसी स्तर की सुविधा की जरूरत है। सोमनाथ ट्रस्ट के सभी अतिथि गृह में अधिकतम दो दिन के लिए ही रूम की ऑनलाइन बुकिंग होती है। साथ ही इसके लिए एडवांस में बुकिंग करानी पड़ती है। तत्काल बु​किंग की सुविधा भी होनी चाहिए। हालांकि ट्रस्ट का कहना है कि यदि उपलब्ध होती है तो बुकिंग होती है। इसके चलते मजबूरन महंगे निजी होटलों में रुकना पड़ता है जो मंदिर से दूरी पर हैं।

एक नजर में डिजिटल दर्शन

2015- ई-दर्शन की शुरुआत

7 -सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म

45+ देशों तक पहुंच
करोड़ों श्रद्धालु सोशल मीडिया से जुड़े

सुबह-दोपहर-शाम श्रृंगार दर्शन ऑनलाइन