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फेफड़ों का कैंसर बढ़ा रहा चिंता, पांच साल में पहुंचे 4830 मरीज

चिंताजनक बात यह है कि हर साल मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से बड़ी संख्या में मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
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World Lung Cancer Day

एआइ फोटो

Ahmedabad: फेफड़ों का कैंसर मौत के बड़े कारणों में से एक बनता जा रहा है। अहमदाबाद सिविल मेडिसिटी परिसर स्थित गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआइ) के आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं।गुजरात के सबसे बड़े कैंसर अस्पताल में पिछले पांच वर्षों के दौरान फेफड़ों के कैंसर के 4830 मरीजों का उपचार हुआ है। एक एक अगस्त को विश्व फेफड़ा दिवस है।

ग्लोबोकैन-2022 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर वर्ष 1.12 लाख से अधिक फेफड़ों के कैंसर के नए मामले सामने आते हैं, जबकि हर वर्ष इससे 98687 लोगों की मौत हो जाती है। दुनिया भर में हर साल लगभग 26.37 लाख नए मरीज मिलते हैं और 18.61 लाख लोगों की मौत होती है। यही कारण है कि फेफड़ों का कैंसर आज दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बन चुका है।

हर साल बढ़ते गए मरीज

जीसीआरआइ के आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष फेफड़ों के कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। वर्ष 2021 में अस्पताल में फेफड़ों के कैंसर के 813 मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 865 हो गई। वर्ष 2023 में 933, वर्ष 2024 में 1086 और वर्ष 2025 में 1,133 मरीज उपचार के लिए पहुंचे।

हर पांच में चार मरीज पुरुष

पांच वर्षों में उपचार कराने वाले 4830 मरीजों में 3,931 पुरुष (81.4 प्रतिशत) और 899 महिलाएं (18.6 प्रतिशत) थीं। इन महिलाओं में वर्ष 2021 में 139, वर्ष 2022 में 149, वर्ष 2023 में 200, वर्ष 2024 में 197 तथा वर्ष 2025 में 214 शामिल थीं। विशेषज्ञों के के अनुसार तंबाकू का सेवन पुरुषों में अधिक होने के कारण यह बीमारी उनमें ज्यादा पाई जाती है।

ये हैं प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि तम्बाकू का किसी भी तरह से सेवन करना कैंसर का बड़ा कारण है। बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन, परोक्ष धूम्रपान, वायु प्रदूषण, औद्योगिक रसायनों तथा एस्बेस्टस जैसे पदार्थों के लंबे समय तक संपर्क फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

लंबे समय तक खांसी रहना, खांसी में खून आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, आवाज में बदलाव या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

आधुनिक उपचार की सुविधा

जीसीआरआइ में फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए पेट सीटी, 3, आधुनिक एमआरआइ, सीटी स्कैन, ब्रोंकोस्कोपी, रोबोटिक सर्जरी, साइबरनाइफ, ट्रू बीम, टोमोथेरेपी, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। पीएमजेएवाइ सहित सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मरीजों का निशुल्क या रियायती दर पर उपचार किया जाता है।