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अजमेर. राजस्थान में भू अभिलेख आधुनिकीकरण के महाभियान ने लोक राहत का नया अध्याय लिखा है जहां 33 जिलों की 339 में से 292 तहसीलें ऑनलाइन होकर कार्य कर रही हैं। इन ऑनलाइन तहसीलों में ई-मित्रों के माध्यम से ई हस्ताक्षरित खाते की नकल, खसरा गिरदावरी व राजस्व नक्शों की प्रतिलिपियां जारी की जाने लगी है, वहीं जमाबंदी भी आम जन के लिए ऑनलाइन उपलब्ध है। राज्य के अजमेर, कोटा, श्रीगंगानगर, चुरू, जयपुर, जालौर, जैसलमेर, झालावाड़, झुंझुंनूं, धौलपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और सीकर जिले पूरी तरह ऑनलाइन की श्रेणी में शामिल हो गए हंै। जल्द ही राज्य की सभी 339 तहसीलें ऑनलाइन हो जाएंगी। राज्य के 529 उप पंजीयक कार्यालयों में पूर्व में पंजीकृत हो चुके दस्तावेजों की स्केनिंग करवा डाटा सेंटर के उच्च तकनीकी सर्वर पर सहेजा जा रहा है। ये दस्तावेज आसानी से आमजन को उपलब्ध जाएंगे। भू-अभिलेख आधुनिकीकरण के बाद अब किसी भी समय तथा किसी भी स्थान पर रिकॉर्ड की ऑनलाइन उपलब्धता से यह राह आसान हो गई है। राज्य के राजस्व विभाग, भू-प्रबन्ध विभाग व पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग पृथक-पृथक रूप से अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं।
106 तहसीलों के लिए रिकॉर्ड स्केनिंग का वर्कआर्डर जारी
राजस्व मंडल के निबंधक बीएल मीणा ने बताया किं तहसीलों में संधारित रिकॉर्ड रूम्स को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित मॉडर्न रिकॉर्ड रूम के रूप में स्थापित कर वहां राजस्व रिकॉर्ड को स्केन कर सुरक्षित किया जा रहा है। राज्य में 339 तहसीलों में से 106 तहसीलों के लिए चतुर्थ चरण लीगेसी रिकॉर्ड स्केनिंग का कार्यादेश जारी कर दिया गया है जिनमें से 13 तहसीलों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है। राज्य में राजस्व नक्शों की सुरक्षा के साथ ही खातेदारों का विवरण अंकित करने व काश्तकारों को रिकार्ड की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने को लेकर खसरा नक्शों के डिजिटाइजेशन का कार्य राज्य सरकार करवा रही है। इसमें सेटलमेंन्ट शीटों की स्केनिंग, डिजिटाइजेशन, तरमीम तथा जमाबंदी को लिंक करने के कार्य भी शामिल हैं।
नक्शे डिजिटाइजेशन का काम जारी
राज्य के 33 जिलों में इस कार्यक्रम के तहत 6 फर्मों के माध्यम से नक्शे डिजिटाइज करने का कार्य किया जा रहा है अब तक राज्य के 46 हजार 821 गांवों की 1 लाख 29 हजार 955 शीट्स डिजिटाइज्ड हो चुकी हैं। इनमें से 95 हजार 897 शीट्स को अंतिम तरमीम पूरी कर ई-धरती सॉफ्टवेयर से लिंक कर दिया गया है। तहसीलों का भू अभिलेख पब्लिक डॉमिन पर उपलब्ध है, जिसके माध्यम से काश्तकार के नाम, पिता के नाम, खसरा नम्बर, खाता नम्बर आदि से जमाबन्दी की जानकारी एक क्लिक में उपलब्ध हो पा रही है।
ई-धरती सॉफ्टवेयर
काश्तकारों को राजस्व रिकॉर्ड की उपलब्धता को लेकर एनआईसी द्वारा ई-धरती सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है।
ई-मित्र से जारी हो रही गिरदावरी व नक्शों की प्रतिलिपियां
अब कृषक व आमजन को ऑनलाइन जमाबंदी के अवलोकन की सुविधा के साथ ही खसरा गिरदावरी व नामान्तरकरण की ई-साइन्ड प्रतिलिपियां राज्य की सभी ऑनलाइन तहसीलों में जारी करने का प्रावधान कर दिया गया है। राजस्व विभाग की ओर से 17 मई 2019 को जारी अधिसूचनानुसार ई-मित्र के माध्यम से ई साइन्ड खसरा गिरदावरी व नक्शों की प्रतिलिपियां जारी की जा रही है।
Published on:
27 Jul 2021 09:48 pm
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