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patrika impact- वो कर रहे थे गर्भ में मासूमों की हत्या, औषधि नियंत्रण विभाग ने लिया एक्शन जांच के दिए आदेश

मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर की परामर्श पर्ची के गर्भपात की दवाइयां बेचे जाने के मामले का खुलासा होने के बाद औषधि नियंत्रक विभाग हरकत में आया।

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after patrika sting operation drug control department took action against chemist who was selling birth control pills

मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर की परामर्श पर्ची के गर्भपात की दवाइयां बेचे जाने के मामले का खुलासा होने के बाद औषधि नियंत्रक विभाग हरकत में आया।

मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर की परामर्श पर्ची के गर्भपात की दवाइयां बेचे जाने के मामले का खुलासा होने के बाद औषधि नियंत्रक विभाग हरकत में आया। विभाग ने दवा बेचने वाले मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर कार्रवाई की। जांच में मेडिकल स्टोर संचालक ने गर्भपात की दवा बेचे जाने की बात कबूली है। विभाग की ओर से भेजे जाने वाले नोटिस का जवाब मिलने के बाद मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलम्बल की कार्रवाई की जाएगी।


राजस्थान पत्रिका ने स्टिंग के जरिए यह खुलासा किया था कि शहर में कुछ मेडिकल स्टोर संचालक न केवल बिना परामर्श पर्ची के दवा बेच रहे हैं बल्कि गर्भपात के अन्य उपाय भी बता रहे हैं। शुक्रवार को 'गर्भ में हत्या की दुकानदार ले रहे गांरटी Ó शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग हरकत में आया।

औषधि नियंत्रण अधिकारी ईश्वर यादव ने इसे गंभीरता से लिया और टीम के साथ गंज स्थित मेडिकल स्टोर पर पहुंचे और छापा मारा।

लड़के की बताई करतूत

मेडिकल स्टोर संचालक ने पूछताछ में बताया कि उसके यहां पूर्व में एक लड़का काम करता था। वह कुछ दिन पूर्व चोरी करके भाग गया। उसी लड़के ने गर्भपात की दवाइयां लाकर रखी थी। एेसे में सवाल यह है कि आखिर गुरुवार को जब दवा मांगी गई तो कुछ देर बाद दवा कहां से लाकर उपलब्ध कराई गई।

शहर में मेडिकल स्टोर संचालक जिस तरह खुलेआम गर्भ में हत्या की दवाइयां बेच रहे हैं उससे यह तय है कि उन्हें किसी का कोई डर नहीं है। डर हो भी कैसे...? एेसा लगता है जैसे औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से उन्हें खुली छूट दे रखी हो। यह तो एक उदाहरण है। एेसे न जाने रोजाना कितने लोगों की जान के साथ खेला जा रहा होगा। सबको पता है कि केवल गर्भपात की दवाइयां ही नहीं बल्कि कोई भी दवा बिना डॉक्टर की परामर्श पर्ची के देना कानूनी अपराध है।

इसके बावजूद छोटे से मुनाफे के लालच में युवाओं को नशे तक की दवाइयां थमा दी जाती हैं। इतना ही नहीं, नकली दवाइयां तक भी बेची जा रही हैं। दो दिन पहले ही एक मेडिकल स्टोर पर एेसा मामला सामने आया है। एेसा इसलिए भी हो रहा है क्योंकि इन मेडिकल स्टोरों पर अनट्रेंड युवकों को काम पर रख लिया जाता है, जो खुद की ऊपरी कमाई के लिए चोरी छिपे प्रतिबंधित दवाइयां भी बेचने से बाज नहीं आ रहे।

राजस्थान पत्रिका की ओर से गुरुवार को किए गए स्टिंग ऑपरेशन में इसका भी खुलासा हुआ है। मेडिकल स्टोर संचालकों के फर्क इसलिए भी नहीं पड़ता क्योंकि कभी कभार कोई कार्रवाई होती भी है तो मामूली सी सजा देकर छोड़ दिया जाता है। ज्यादा से ज्यादा एक-दो या चार दिन के लिए लाइंसेस निलम्बित कर दिया जाता है।

सवाल यह है कि हर बार राजस्थान पत्रिका के स्टिंग ऑपरेशन के बाद ही विभाग की आंखें क्यों खुलती है। समय-समय पर विभाग खुद ही इस तरह बोगस ग्राहक भेज कर मेडिकल स्टोरों की खैर खबर लेता रहे तो कई जानें बच सकती है। लेकिन लगता है कि विभाग को इससे कोई सरोकार नहीं।