
Muslim widow pention in ajmer
युगलेश शर्मा/अजमेर।
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में प्रबंध संभालने वाली दरगाह कमेटी महिलाओं को लेकर खास फैसला कर सकती है। कमेटी बेवाओं को पेंशन देने का कार्य फिर से शुरू कर सकती है। कमेटी इसके लिए एक सर्वे करवा रही है। इसमें वास्तविक हकदार को ही पेंशन मिल सकेगी। फिलहाल केवल अजमेर जिले की महिलाओं के लिए ही विधवा पेंशन शुरू किए जाने की संकेत मिले हैं। दरगाह कमेटी की सोमवार को होने वाली बैठक में इस पर निर्णय किया जा सकता है।
दरगाह कमेटी बेवाओं को 300 रुपए प्रतिमाह पेंशन के रूप में देती है। पिछले साल पूर्व नाजिम मंसूर अली खान ने यह पेंशन बंद कर दी। इसके पीछे तर्क था कि जिन बेवाओं को पेंशन दी जा रही है, उनका वेरिफिकेशन नहीं हो रखा। साथ ही डूंगरपुर, इंदौर और मुम्बई तक की महिलाओं को विधवा पेंशन जारी की जा रही थी। कई दिनों बाद कमेटी ने फिर से पेंशन शुरू करने का मानस बनाया है।
इसके लिए 5 कमेटियों का गठन किया गया है जो सर्वे करके वास्तविक हकदार के नाम दरगाह कमेटी को सौंपेंगी। फिलहाल अजमेर शहर में 150 बेवाओं तक टीम पहुंच चुकी है, यह सभी पेंशन की हकदार बताई जा रही हैं। इनसे संबंधित दस्तावेज ले लिए गए हैं।
1200 बेवाओं को पेंशन
दरगाह कमेटी से 1200 से अधिक बेवाओं को पेंशन जारी की जा रही थी। इनमें से अजमेर शहर की करीब 400 बेवा ही शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि पूर्व में केवल अजमेर जिले की बेवाओं को ही पेंशन दी जा रही थी लेकिन दरगाह कमेटी के कुछ सदस्यों ने अपने क्षेत्रों में भी बेवाओं को यहां से पेंशन दिलाना शुरू कर दिया। इसमें डूंगरपुर, इंदौर और मुम्बई तक पेंशन भेजे जाने की बात सामने आई है। लाखों रुपए अजमेर से बाहर जाते देख दरगाह कमेटी ने पेंशन पर ही रोक लगा दी थी। ऐसे में माना जा रहा है कि अब अजमेर जिले से बाहर की बेवाओं को पेंशन नहीं देंगे।
Published on:
07 Jan 2018 07:59 am
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