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अजमेर में लोग यूं ही पहाड़ों पर देखते पैंथर, वन विभाग को नहीं आते नजर

वन विभाग को सालाना वन्य जीव गणना और सामान्य दिनों में भी पैंथर नहीं दिखते हैं। विभाग अपनी गणना में पैंथर की रिपोर्ट शून्य भेज रहा है।

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panther in ajmer hill area

panther in ajmer hill area

जिले के पहाड़ी क्षेत्रों मलोग यूं ही पैंथर को घूमते-फिरते देख लेते हैं, लेकिन वन विभाग को सालाना वन्य जीव गणना और सामान्य दिनों में भी पैंथर नहीं दिखते हैं। पिछले दस साल में विभाग अपनी गणना में पैंथर की रिपोर्ट शून्य भेज रहा है। वनकर्मियों को विभिन्न जलाशयों और चिन्हित स्थानों के निकट और पहाड़ी इलाकों में पैंथर (बघेरा) नहीं देखते। वह सिर्फ सियार, बिज्जू, साही, नेवला और अन्य वन्य जीवों की रिपोर्ट भेजता है।

अजमेर वन मंडल के किशनगढ़ में गूंदोलाव झील, ब्यावर में सेलीबेरी, माना घाटी, पुष्कर में गौमुख पहाड़, बैजनाथ मंदिर, नसीराबाद में सिंगावल माताजी का स्थान, सरवाड़ में अरवड़, अरनिया-जालिया के बीच, नारायणसिंह का कुआं, सावर-कोटा मार्ग और अन्य वाटर हॉल पर वन्य जीवों की गणना होती है। कार्मिकों को खरगोश, नेवले, मोर, अजगर, जलमुर्गी, बिज्जू और अन्य जीव ही नजर आते हैं।

यहां अक्सर दिखता पैंथर
अजमेर में जयपाल बाबा मंदिर, गौरी कुंड, चौरसियावास तालाब, आनासागर, फायसागर, चश्मा ए नूर, नरवर और अन्य स्थानों पर अक्सर पैंथर दिखता है। स्थानीय लोग इसकी हलचल देखते हैं। लेकिन वन विभाग को यहां कभी भी पैंथर की उपस्थिति का एहसास नहीं हुआ है। पुष्कर-ब्यावर क्षेत्र पर नजरअजमेर मंडल के पुष्कर, ब्यावर और जवाजा क्षेत्र पर विभाग की विशेष नजरें रहती हैं। पहाड़ी इलाका और पेड़-पौधों के कारण इन इलाकों में अक्सर पैंथर, सियार, लोमड़ी, अजगर और अन्य वन्य जीव दिखाई देते रहे हैं। इन इलाकों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पैंथर कई बार दिख चुका है।

लगाते पिंजरा, लौटते खाली हाथ
पिछले साल अजमेर से सटे कल्याणीपुरा क्षेत्र में भी ग्रामीणों ने पैंथर दिखने की बात कही, पर विभाग को यहां से खाली हाथ लौटना पड़ा था। ऐसा एकाध बार नहीं बल्कि कई बार हो चुका है। जहां ग्रामीण पैंथर की उपस्थिति की सूचना देते हैं, वहीं वन विभाग को वह नजर नहीं आता है।

इस साल गणना का इंतजार

साल 2018 में सालाना वन्य जीव गणना मई-जून में होगी। इसके तहत पूर्णिमा की रात कर्मचारी वन्य जीव गणना करेंगे। विभिन्न इलाकों में गए कर्मचारियों के दल गठित किए जाते हैं। वन्य जीवों की सूचनाओं का संकलन कर रिपोर्ट तैयार होती है। बाद में इसे वन मुख्यालय जयपुर भेजा जाता है।