
professors in engineering colleges
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
राज्य के 11 इंजीनियरिंग कॉलेज (Engineering colleges) में तकनीकी ब्रांच को एसोसिएट और असिसटेंट प्रोफेसर चला हैं। किसी भी विभाग में प्रोफेसर (Professor) कार्यरत नहीं है। नियम बनाने वाले एआईसीटीई और सरकार को भी इसकी परवाह नहीं है। जबकि संस्थानों में विभागीय उत्कृष्टता और अनुभव के लिए प्रोफेसर होने जरूरी हैं।
अजमेर के दो इंजीनियरिंग कॉलेज (Engineering colleges) सहित बीकानेर , झालावाड़, भरतपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, धौलपुर, बाडमेर, करौली और बारां में सरकारी इंजीनियरिंग और निजी क्षेत्र के 120 से ज्यादा कॉलेज हैं। इनमें सीटों की संख्या 60 से 70 हजार तक हैं। लेकिन अधिकांश कॉलेज में एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर ही पढ़ा रहे हैं।
11 कॉलेज में नहीं प्रोफेसर
1996-97 और उसके बाद खुले 11 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज (Engineering colleges) में इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, मैकेनिकल, सिविल, आईटी और अन्य ब्रांच संचालित हैं। इनके किसी टेक्निकल ब्रांच में विभागों में प्रोफेसर (Professor) कार्यरत नहीं हैं। केवल लेक्चरर और रीडर ही विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं।
ना पदोन्नति ना सीधी भर्ती...
नियमानुसार संस्थानों में कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत एसोसिएट प्रोफेसर को दस साल शिक्षण, शोध पत्र और पुस्तक लेखन, पीएचडी और अन्य उत्कृष्टता के आधार पर प्रोफेसर (Professor) बनाया जाता है। कई संस्थानों में प्रोफेसर पर सीधी भर्तियां होती हैं। लेकिन राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज (Engineering colleges) में इसकी पालना नहीं हो रही है। निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में भी हालात बेहतर नहीं हैं।
Published on:
28 Jan 2022 08:15 am
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
