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पांच विधानसभा सीटें ऐसी जिन पर दशकों से निर्दलीयों की नहीं गली ‘दाल’

ब्यावर विधानसभा सीट पर 1990 के चुनाव में निर्दलीयों के बीच हुआ था मुकाबला, मसूदा, किशनगढ़ व ब्यावर में निर्दलीयों ने खोला था खाता, अजमेर के आठ विधानसभा क्षेत्रों का मिजाज

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पांच विधानसभा सीटें ऐसी जिन पर दशकों से निर्दलीयों की नहीं गली ‘दाल’

पांच विधानसभा सीटें ऐसी जिन पर दशकों से निर्दलीयों की नहीं गली ‘दाल’

चन्द्र प्रकाश जोशी

अजमेर. जिले की आठ विधानसभा सीटों में से पिछले चार दशक में पांच सीटों पर कभी निर्दलीयों की दाल नहीं गल पाई। जबकि तीन विधानसभा सीटों का मिजाज निर्दलीयों को भाया। ब्यावर विधानसभा सीट पर पार्टियों से अधिक निर्दलीयों से कड़ा मुकाबला रहा।
अजमेर जिले की नसीराबाद विधानसभा सीट से आजादी के बाद से आज तक एक बार भी निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाया। इसी तरह अजमेर उत्तर विधानसभा सीट पर 1957 में निर्दलीय प्रत्याशी अर्जनदास ने कांग्रेस के प्रभुदास को चुनाव में हराया। अजमेर दक्षिण में भी 1957 में निर्दलीय महेन्द्र सिंह ने कांग्रेस के बालकृष्ण कौल को हराया। मगर इसके बाद हुए 13 चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी दोनों सीटों से कभी चुनाव नहीं जीत पाए।

तीन विधानसभा सीटों से जीते निर्दलीय

किशनगढ़ : वर्ष 2018 में निर्दलीय प्रत्याशी सुरेश टाक ने भाजपा के विकास चौधरी को हराया।
मसूदा : वर्ष 2008 में निर्दलीय प्रत्याशी ब्रह्मदेव कुमावत ने कांग्रेस के रामचन्द्र चौधरी को हराया।

पहली बार ब्यावर में निर्दलीयों की बीच रही कांटे की टक्कर

ब्यावर में वर्ष 1990 में निर्दलीय प्रत्याशी चंपालाल जैन ने निर्दलीय प्रत्याशी लाल सिंह को मात दी। जैन को 18534 वोट मिले जबकि लालसिंह को 16401 वोट मिले। इस चुनाव में भाजपा एवं कांग्रेस के प्रत्याशी तीसरे व चौथे नम्बर पर रहे।
इन सीटों पर निर्दलीयों ने दी थी कड़ी टक्कर

ब्यावर में 2008 में के.सी चौधरी, 1993 में गोविन्दसिंह टक्कर देते हुए दूसरे स्थान पर रहे। किशनगढ़ में भी 1951 में वल्लभदास, 1952 में अमरदान, 1957 में चांदमल, 1967 में रामचन्द्र ने टक्कर दी। वहीं केकड़ी में भी 1957 में सुखराज सिंह दूसरे नम्बर पर रहे।