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जाइए हम नहीं मानते आपके ऑर्डर, मर्जी होगी तो करेंगे ये काम

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B,ed college website

B,ed college website

अजमेर. प्रदेश के कई शिक्षक प्रशिक्षण (बीएड) महाविद्यालयों ने वेबसाइट नहीं बनाई है। कॉलेज शिक्षा आयुक्त के आदेश हवा हो गए हैं। ऐसा तब है जबकि यूजीसी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय पारदर्शिता की बातें कर रहा है।

प्रदेश में बीएड सहित निजी कॉलेज संचालित हैं। इनमें दो वर्षीय पीटीईटी, चार वर्षीय बीएसससी और बीए बीएड, कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर कोर्स संचालित हैं। खासतौर पर पिछले 10-15 साल में बीएड पाठ्यक्रम वाले कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इनमें 90 प्रतिशत कॉलेज निजी क्षेत्र में हैं।

बनानी थी वेबसाइट..
तत्कालीन कॉलेज शिक्षा आयुक्त आशुतोष ए. टी पेडणेकर ने पिछले साल सभी शिक्षक प्रशिक्षण (बीएड) और निजी कॉलेज को अपनी वेबसाइट बनाने के निर्देश दिए थे। वेबसाइट में कॉलेज का नाम और फोटो, कॉलेज के भवन में कमरों की संख्या, लेब, कॉलेज में संचालित कोर्स और उनमें स्वीकृत सीट, अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या, शैक्षिक और अशैक्षिक स्टाफ की सूची, शिक्षकों की योग्यता, नौकरी संभालने की तिथि, स्थाई-अस्थाई और अन्य सूचनाएं अपलोड करनी थी।

कॉलेज को नहीं परवाह

निदेशालय के आदेश की बीएड कॉलेज ने रत्तीभर परवाह नहीं की। 80 प्रतिशत से ज्यादा बीएड कॉलेज ने वेबसाइट बनाकर सूचना अपलोड नहीं की हैं। जबकि निदेशालय ने वेबसाइट नहीं बनाने पर नियमानुसार कार्रवाई के आदेश दिए थे।

मिलती रही हैं कई शिकायत
बीएडकॉलेज के खिलाफ लगातार सरकार और संबंधित विश्वविद्यालयों को शिकायतें मिलती रही हैं। इनमें कम योग्यता वाले शिक्षकों की नियुक्ति, कॉलेज भवन में संसाधनों की कमी, अतिरिक्त फीस वसूली, पुस्तकालय में पर्याप्त पुस्तकें और लेब में कम्प्यूटर नहीं होने जैसे मामले प्रमुख हैं। कई कॉलेज तो निरीक्षण के दौरान एकदूसरे के स्टाफ और संसाधनों को ‘खुद’ का बताने से नहीं चूकते हैं।

विश्वविद्यालय मूंदे बैठे आंखें...

अधिकांश निजी और बीएड कॉलेज सियासी रसूखात से संचालित हैं। सम्बद्ध विश्वविद्यालय इन कॉलेज की कथित अनियमितताओं से वाफिक हैं। लेकिन संचालकों की ऊपरी पहुंच के चलते विश्वविद्यालय आंखें मंूदे बैठे रहते हैं। पिछले 15 साल में गिने-चुने कॉलेज के खिलाफ ही विश्वविद्यालयों ने बड़ी कार्रवाई की है।