
vice chancellor in mdsu
अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में कुलपति पद पर सस्पेंस बना हुआ है। राजस्थान हाईकोर्ट की रोक के चलते कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह कामकाज नहीं कर सकते हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के वैकिल्पक कार्यभार की बात पूछे जाने के बाद सबकी निगाहें सरकार और एवं राज्यपाल कल्याण सिंह पर टिकी हैं।
लक्ष्मीनारायण बैरवा की जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग और जस्टिस दिनेश मेहता की खंडपीठ ने बीते वर्ष 11 अक्टूबर को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह को नोटिस जारी कर 26 अक्टूबर तक कामकाज पर रोक लगाई थी। इसके बाद न्यायालय ने रोक 1,16, 28 नवंबर, 3 दिसंबर, 11 और 29 जनवरी एवं 21 और 25 और 27 फरवरी तक बढ़ा दी थी।
विधानसभा में पारित एक्ट...
विधानसभा में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2017 पारित हो चुका है। अधिनियम की धारा 19 (10) के तहत किसी विश्वविद्यालय के कुलपति पद की कोई स्थाई रिक्ति, मृत्यु, त्यागपत्र, हटाए जाने, निबंलन के कारण या अन्यथा हो जाए तो उप धारा 9 के अधीन संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव तत्काल कुलाधिपति-राज्यपाल को सूचना भेजेंगे। कुलाधिपति सरकार से परामर्श कर किसी दूसरे विश्वविद्यालय के स्थाई कुलपति को अतिरिक्त दायित्व सौंपेंगे। हाईकोर्ट ने इसी एक्ट के तहत सरकार से वैकल्पिक कार्यभार के बारे में पूछा है।
यथास्थिति या किसी को कार्यभार?
कुलपति के बगैर विश्वविद्यालय की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रूसा का 11 करोड़ रुपए का बजट अनुपयोगी पड़ा है। प्रो. सतीश अग्रवाल मामले की आंतरिक जांच नहीं हो पाई है। कर्मचारियों-अधिकारियों, शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ नहीं मिल पाया है। विश्वविद्यालय का नवां दीक्षान्त समारोह और नए शिक्षकों, अधिकारियों की भर्तियां अटकी हुई हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार और राजभवन पर सबकी नजरें हैं। एक्ट के अनुसार सरकार और राजभवन चाहे तो वैकल्पिक व्यवस्था भी कर सकते हैं।
Published on:
28 Feb 2019 07:42 am
