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बजरी की कालाबाजारी…रात में खाली होते डम्पर, दिन में चलता कारोबार

पुलिस, प्रशासन व खनिज विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से न तो बजरी खनन पर अंकुश लग पा रहा है और न ही इनकी बिक्री पर।
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illegal business

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सुनील जैन/ अमित काकड़ा

अजमेर. सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद जिले में बजरी खनन थम नहीं रहा है। खनन कर चोरी-छिपे शहर में लाइ जा रही बजरी की बेरोकटोक बिक्री हो रही है। इतना जरूर है कि जहां शहर में कई जगह पर पहले बड़े-बड़े ढेऱ बजरी के दिखाई देते थे, वहीं अब छोटी-छोटी ढेरियां लगाकर बिक्री की जा रही है।

यह भी बताया जा रहा है कि रोक के कारण पुष्कर की बालू रेत मिलाकर बजरी की गुणवत्ता में कमी भी लाई जा रही है। साथ ही दाम दो गुने बढ़ा दिए गए हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में रात के समय डम्पर खाली होते हैं और दिन के समय में ट्रेक्टर से बजरी भरकर बजरी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचाई जाती है।

पुलिस, प्रशासन व खनिज विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से न तो बजरी खनन पर अंकुश लग पा रहा है और न ही इनकी बिक्री पर। ऐसे में बजरी माफिया के हौंसले बुलंद है और भावों में बढोतरी ने आमजन परेशान है।

केस संख्या - 1 : तेईस सौ रुपए बताई रेट
पत्रिका ने जब शहर के लोहागल रोड पर जवाहर रंगमंच के पास एक ढेर से ट्रेक्टर ट्रॉली भर रहे चालक से पूछा तो उसने बताया कि एक ट्रेक्टर ट्रॉली बजरी की रेट तेईस सौ रुपए है। कम करने की बात कहने पर उसने कहा कि रोक है और इस रिस्क में भी बजरी मिल रही है, यह कम बात नहीं। भाव तो यही लगेंगे।

केस संख्या - 3 : तीन हजार रुपए लगेंगे
वैशाली नगर में पेट्रोल पम्प के पास लगे ढेर से एक ट्रेक्टर ट्रॉली भरती दिखाई दी। जब यहां पर बजरी के लिए पूछा तो उसने बताया कि यह ट्रॉली तो कहीं ओर भेज रहे है। अभी हमारे पास छोटा ट्रक है। इसमें डेढ़ ट्रॉली बजरी आती है। इसलिए इसके तीन हजार रुपए लगेंगे। उसने अपने मोबाइल नम्बर भी दिए।

केस संख्या -3 : भर रहे थे ट्रॉलियां

पत्रिका टीम ने माकड़वाली रोड पर चारण शोध संस्थान, बी.के.कोल नगर, ज्ञान विहार के सामने, आनासागर चौपाटी के पास, जनाना हॉस्पिटल के पास भी खाली पड़े भूखंडों में बजरी के ढेर देखे गए। यहां पर कुछ जगहों पर ट्रेक्टर ट्रॉली में बजरी भरी जा रही थी तो कुछ जगह पर कोई दिखाई नहीं दिया।