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: अभियान :: पत्रिका टॉक शो : बांडी नदी से हटे अतिक्रमण, क्षेत्रवासी हुए मुखर

- बांडी नदी के अतिक्रमण से घरों में घुसा पानी, प्रभावी कार्रवाई की दरकार बांडी नदी की सुरक्षा एवं पानी के निर्बाध रूप से झील तक पहुंचने के लिए क्षेत्रवासियों ने भी राजस्थान पत्रिका के साथ कदम बढ़ाए हैं। फॉयसागर से आनासागर झील के मध्य बांडी नदी के दायरे में अतिक्रमण, झाडि़यों से मार्ग अवरुद्ध होने एवं पक्के निर्माण को हटाने के लिए क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग करने के साथ ही कई सुझाव भी दिए हैं  

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अजमेर

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Dilip Sharma

Feb 29, 2024

: अभियान :: पत्रिका टॉक शो : बांडी नदी से हटे अतिक्रमण, क्षेत्रवासी हुए मुखर

: अभियान :: पत्रिका टॉक शो : बांडी नदी से हटे अतिक्रमण, क्षेत्रवासी हुए मुखर

बांडी नदी की सुरक्षा एवं पानी के निर्बाध रूप से झील तक पहुंचने के लिए क्षेत्रवासियों ने भी राजस्थान पत्रिका के साथ कदम बढ़ाए हैं। फॉयसागर से आनासागर झील के मध्य बांडी नदी के दायरे में अतिक्रमण, झाडि़यों से मार्ग अवरुद्ध होने एवं पक्के निर्माण को हटाने के लिए क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग करने के साथ ही कई सुझाव भी दिए हैं।

राजस्थान पत्रिका की ओर से बुधवार को बडकालेश्वर महादेव मंदिर में क्षेत्रीय लोगों से इस मुद्दे पर परिचर्चा की गई। इसमें लोगों ने सरकारी अधिकारियों की लापरवाही को बांडी नदी की दुर्दशा का कारण बताया। कृष्ण विहार, गणपति नगर व राधा विहार के क्षेत्रवासियों का कहना है कि पहले फॉयसागर का अतिरिक्त पानी बांडी नदी से होते हुए आनासागर में मिलता था। अब यहां आसपास अतिक्रमण होने के कारण नदी की चौड़ाई 50 फीट से घटकर कई जगह मात्र 10 फीट ही रह गई है। अतिक्रमण के कारण बारिश में ओवरफ्लो पानी साईड की नालियों से निकल कर घरों व मुख्य रास्तों पर जमा हो जाता है। कई जगह मलबा व झाडि़यां उगाकर पानी के रास्ते को बदल कर बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण किया गया।

क्षेत्रवासी घनश्याम खंडेलवाल, संपत सिंह कुमट, कन्हैयालाल जोशी, संजू भटनागर, बीना चितलांग्या, भगवती सोनी, शिमला शर्मा, नीलम चतुर्वेदी, योगिता वर्मा आदि परिचर्चा में शामिल हुए।

जलकुंभी से बांडी नदी जामशक्ति केन्द्र प्रभारी कन्हैयालाल जोशी ने बताया कि बांडी नदी में अतिक्रमण के साथ जलकुंभी भी प्रमुख कारण है। यहां जलकुंभी को साफ नहीं किया जाता। सफाई के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन जलकुंभी को पूरी तरह से नहीं हटाया जाता। कुछ ही दिनों में यह फिर फैल जाती है। बांडी नदी के सिकुडने की यह वजह भी प्रमुख है।