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सीबीएसई भी मामले में मौन, दूसरी बार हुई शहर के नामचीन स्कूल में घटना

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cbse school case

cbse school case

अजमेर

शहर के नामचीन स्कूल में दो साल में लगातार दूसरी मर्तबा विद्यार्थी के शारीरिक उत्पीडऩ का मामला सामने आया है। पहले मामले में बाल कल्याण समिति, बाल संरक्षण आयोग और दूसरे में पुलिस तक शिकायत पहुंची। लेकिन उच्च रसूखात से कार्रवाई होती नहीं दिख रही। देश भर में स्कूलों को निर्देश देने वाला सीबीएसई भी इस मामले में खामोश है।

सीबीएसई से सम्बद्ध शहर के स्कूल में पिछले दिनों एक छात्र को शराब और मादक द्रव्य पिलाने, मारपीट करने और कथित उत्पीडऩ का मामला उजागर हुआ है। इससे पहले भी साल 2016 में एक सीनियर के जूनियर विद्यार्थी से मारपीट और उत्पीडऩ की घटना हुई थी। इसके बावजूद स्कूल प्रशासन ने इन मामलों को बेहद हल्के ढंग से लिया। हालांकि पिछले साल स्कूल के गवर्निंग कौंसिल सदस्यों ने आंतरिक बैठक कर प्रशासन को कड़ी हिदायत दी थी। इसके बावजूद स्कूल में शराब, मादक द्रव्यों का पहुंचना समझ से परे है।

सीबीएसई देख रहा तमाशा...

पिछले साल गुरूग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में प्रद्युम्न हत्याकांड हुआ था। इसके बाद सीबीएसई ने कड़े निर्देश जारी किए। इनमें विद्यार्थियों को शारीरिक-यौन उत्पीडऩ की जानकारी देना और प्रतिकार का प्रशिक्षण, पॉस्को कमेटी का गठन,. बस चालक, परिचालक, क्लीनर, चतुर्थ श्रेणी और सहायक कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस वेरीफिकेशन और मनोविज्ञानी परीक्षण, स्कूल में अभिभावक-शिक्षक-विद्यार्थियों की कमेटी का गठन जैसे प्रावधान शामिल किए गए। अजमेर के मशहूर स्कूल में विद्यार्थी के साथ इतनी बड़ी घटना हो गई, लेकिन सीबीएसई अब तक तमाशा देख रहा है। बोर्ड स्तर पर स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेजने या आंतरिक जांच कराना मुनासिब नहीं समझा है।

अंदर मची हुई है खलबली

घटना मीडिया में उजागर होने के बाद स्कूल बैकफुट पर है। स्कूल में अंदरूनी स्तर पर खलबली मची हुई है। प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों के अभिभावकों को ई-मेल और पत्र लिखे हैं। हाउस मास्टर, शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। स्टाफ, विद्यार्थियों पर मीडिया से बातचीत करने की पाबंदी लगाई गई है। आंतरिक तौर पर केवल पुलिस जांच पर भरोसे की बात कही गई है। गवर्निंग कौंसिल भी मामले से दूरी बनाए हुए है।

खौफजदा हैं कई विद्यार्थी....

स्कूल में रैगिंग और कथित उत्पीडऩ का मामले सामने आने के बाद कई विद्यार्थी खौफजदा हैं। कइयों के परिजनों ने स्कूल प्रशासन से फोन अथवा व्यक्तिगत संपर्क भी किए हैं। विशेषज्ञों और शिक्षकों के स्तर पर विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी कराई गई है।

हुआ था पुलिस की सख्ती का विरोध

यातायात पुुलिस ने पिछले साल जुलाई में स्कूली वैन-टेम्पो चालकों के खिलाफ अभियान चलाया था। इसमें चालकों के नेमप्लेट युक्त वर्दी पहनने, बाल वाहिनी का लाइसेंस, क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठाने, लड़कियों को आगे की सीट पर नहीं बैठाने, ऑटो-टेम्पो के एक ओर जाली लगाने जैसे प्रावधान शामिल थे। संचालकों ने पुलिस सख्ती का हड़ताल कर विरोध जताया था। पुलिस को कई बार वैन, ऑटो, टेम्पो चालक नशे की हालत में मिले थे।