
पशुओं के प्रति प्रेम जताने के लिए मनाते हैं मंकी-डे
अजमेर. देश-विदेश में प्रतिवर्ष 14 दिसम्बर को मंकी डे मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों में जानवरों के प्रति प्यार जताना है। अजमेर की पुष्कर घाटी में मंकी (बंदर) भारी संख्या में पाए जाते है। इसके कारण यहां पर प्रतिदिन बंदरों को फल, हरी सब्जी, ब्रेड और पुए आदि खिलाने वालों का तांता लगा रहता है। शनिवार को फल खिलाने वालों की संख्या काफी बढ़ जाती है। इसका धार्मिक महत्व भी बताया जाता है। बंदर भी आमजन के हाथ से एक-एक फल लेकर अपने-अपने स्थान पर चले जाते है और सुकून से फल खाते है। राजस्थान पत्रिका ने लोगों से मंकी डे के बारे में पूछा तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। इस पर उन्हें मंकी डे के बारे में बताया तो उन्होंने भी खुशी जाहिर की।
यूं हुई मंकी-डे की शुरूआत
मंकी डे की शुरुआत मजाक के रूप में हुई। जानकारों की मानें तो कैसे सोरो और एरिक मलिकर्नी को जाता है। कैसे सोरो ने पढ़ते समय एक दिन अपने दोस्त के घर पर लटके कैलेंडर में 14 दिसम्बर को मंकी-डे की चिट लगा दी, उन्होंने यह चिट मजाक के तौर पर लगाई थी, लेकिन उनके दोस्तों ने इसे सच मानकर मंकी-डे मनाया। इसके बाद से ही दोनों इसे प्रमोट करने में जुट गए।
बंदरों से जुड़े रोचक तत्थ
- दुनियाभर में बंदरों की 260 प्रजातियां है और इनमें से सबसे ज्यादा ब्राजील में पाई जाती है।
- बंदरों और मनुष्यों का डीएनए करीब 98 फीसदी से एक दूसरे से मिलता है।
- मनुष्यों के अलावा बंदर एकमात्र प्राणी हैं जो केले के छिलके उतारकर खाते हैं, वह हमेशा उसे उल्टा छीलते है।
Published on:
15 Dec 2019 11:40 am
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