
learning outcomes
अजमेर.
कक्षा अध्यापन की पद्धति में समय के साथ बदलाव की जरूरत है। अभी भी स्कूल में कक्षाओं में अध्यापन की पद्धति परिणाम सुधारने-बेहतर करने तक सीमित है। वास्तव में हमें बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना चाहिए। यह बात राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के निदेशक प्रो. ऋषिकेश सेनापति ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में कही।
बढ़ावा नहीं मिला
लर्निंग आउटकम्स-बेस्ट पेडागॉजिकल प्रेक्टिसेज विषय पर आधारित सेमिनार में बोलते हुए प्रो. सेनापति ने कहा कि राष्ट्रीय पाठ्यक्रम-2005 लागू होने के बावजूद प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर सीखने की प्रवृत्ति विकसित नहीं हुई है। कक्षाओं में अध्यापन की पद्धति परिणाम तक ही सीमित है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हमें शोध अभिरुचि और सीखने-प्रयोग करने की शैक्षिक पद्धति को ज्यादा बढ़ावा नहीं मिला है। शिक्षक और विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम के साथ-साथ विषयों को समझने, सीखने और प्रायोगिक अभिरुचि को विकसित करना चाहिए।
अध्ययन-अध्यापन पद्धति में बदलाव
जम्मू-कश्मीर के शिक्षा सचिव मोहम्मद हुसैन मीर ने शैक्षिक नीतियों और सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य की शैक्षिक उपलब्धियों, विभिन्न स्तर पर परीक्षाओं और विद्यार्थियों की अभिरुचियों के बारे में बताया। प्राचार्य प्रो. जी. विश्वनाथप्पा ने कहा कि लर्निंग आउटकम के जरिए अध्ययन-अध्यापन पद्धति में बदलाव लाया जा सकता है। शिक्षकों और विद्यार्थियों में नियमित संवाद, नवाचार और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। प्रो. वी. पी. सिंह ने प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। सेमिनार में 14 प्रदेशों के प्रतिभागियों ने शोध पत्र और विषयवार पेपर प्रस्तुत किए।
Published on:
13 Mar 2019 08:14 am
