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स्टूडेंट्स को नए तरीके से पढऩा होगा एलएलबी कोर्स, वरना नहीं मिले सकेगी डिग्री

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change in law course

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अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के त्रि-वर्षीय एलएलबी कोर्स में बदलाव होगा। सत्र 2019-20 में प्रथम वर्ष से इसकी शुरुआत होगी। इसके तहत परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को पहला प्रश्न करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा 20 नंबर का प्रेक्टिकल भी होगा। प्रथम वर्ष के बाद द्वितीय और तृतीय वर्ष में यह चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

एलएलबी के पाठ्यक्रम में सत्र 2017-18 में बदलाव किया गया था। इसके तहत प्रेक्टिकल और वाइवा हटाकर पूरा पेपर सौ नंबर का कर दिया गया। साथ ही दस में कोई भी प्रश्न हल करने की पद्धति लागू की गई। विश्वविद्यालय से सम्बद्ध लॉ कॉलेज में इसके विपरीत परिणाम सामने आए। प्रेक्टिकल हटाने से विद्यार्थियों की उपस्थिति का ग्राफ कम हो गया। साथ ही पासबुक से पढकऱ पेपर देने की प्रवृत्ति बढ़ गई। लिहाजा विधि संकाय की पाठ्यचर्या समिति (बीओएस) ने इसमें बदलाव की सिफारिश की है।

ताकि विस्तार से पढ़ें विद्यार्थी
बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने सभी विश्वविद्यालयों को त्रि-वर्षीय एलएलबी के कोर्स को शोध अन्वेषणात्मक और रटने के बजाय मिश्रित बनाने को कहा है। इसके तहत महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की विधि संकाय की पाठ्यचर्या समिति ने यह फैसला किया है। लॉ कॉलेज के रीडर डॉ. आर. एन. चौधरी ने बताया कि पूर्व में हुए बदलाव से विद्यार्थियों की कम उपस्थिति और प्रायोगिक अभिरुचि घटने जैसे अनुभव हुए। नए बदलाव से विद्यार्थियों को विस्तृत ज्ञान मलेगा।

यह होंगे संभावित बदलाव (प्रथम वर्ष से)

-सीए/सीएस की तरह विद्यार्थियों को सभी पेपर में पहला प्रश्न करना होगा अनिवार्य
-बकाया प्रश्नों में से कोई चार प्रश्न कर सकेंगे अपनी च्वॉइस से

-80 नम्बर की थ्योरी और 20 नम्बर का प्रेक्टिकल-साक्षात्कार
-सत्र 2019-20 में प्रथम वर्ष से होगी शुरुआत

-चरणबद्ध तरीके से अगले सत्रों में द्वितीय और तृतीय वर्ष में होगा लागू