
अजमेर . कुश्ती के अखाड़े में लोहा मनवा चुकी नामचीन खिलाड़ी बबीता फोगाट का कहना है, कि देश की लड़कियां किसी पहलवान से कम नहीं हैं। लड़कियों में भरपूर हुनर और किसी से भी टक्कर लेने की क्षमता है। उनके हुनर को तराशा जाए तो वे देश का नाम रोशन कर सकती हैं। यहां संस्कृति द स्कूल में रविवार फोगाट एकेडमी के उद्घाटन अवसर पर बबीता ने कहा कि हम बहनों ने अखाड़ा कुश्ती के बारे में कभी सोचा नहीं था।
पिता महावीर सिंह फोगाट की जी-तोड़ मेहनत और प्रेरणा ने जज्बा पैदा किया। हम सभी बहनों ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। घुटने में चोट लगी तो डॉक्टर और सभी लोगों ने कुश्ती छोडऩे की बात कही। लेकिन खिलाड़ी चोट से कभी नहीं घबराते।
भाई राहुल, पापा महावीर सिंह ने चोट को कमजोरी मानने के बजाए हथियार बनाना सिखाया। इसके बाद कॉमनवेल्थ और कई खेलों में मेडल की लाइन लगा दी। इससे पहले संस्कृति स्कूल के चेयरमैन सीताराम गोयल, निदेशक मुकेश गोयल, प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल ए. के. त्यागी और अन्य ने स्वागत किया। इस दौरान कुश्ती के दंगल भी हुए।
लड़कियां किसी से नहीं कम
लड़कियों को कुश्ती में कॅरियर बनाने के सवाल पर बबीता ने कहा कि लड़कियां न कमजोर न किसी की मोहताज हैं। वे किसी पहलवान से कम नहीं हैं। लड़कियों के छुपे हुनर को तराशा जाए तो वे लड़कों से कहीं कम नहीं हैं। हाल के गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा कामयाबी पाई है। फोगाट एकेडमी खोलने का उद्देश्य भी यही है। हमने बहुत असुविधाएं और तकलीफ झेली हैं। आने वाली पीढ़ी और खासतौर पर लड़कियों को निखारने के लिए हम भरपूर प्रयास करेंगे।
दंगल ने बढ़ाई पहचान
दंगल फिल्म का फोगाट परिवार की पहचान बढ़ाने के सवाल पर बबीता ने कहा कि यह काफी हद तक सच है। दंगल ने फोगाट परिवार और कुश्ती की पहचान बढ़ाई है। अब गीता-बबीता को सब जानते हैं। बरसों से क्रिकेट ही भारत में ज्यादा लोकप्रिय रहा है। दंगल और सुल्तान जैसी फिल्मों ने कुश्ती को प्रमोट किया है। वैसे सुशील कुमार और अन्य पहलवानों का भी कुश्ती को पहचान दिलाने में खासा योगदान है।
वरना मां भी होती पहलवान
परिवार की पहलवान परम्परा से जुड़े सवाल पर बबीता ने कहा कि मेरे दादा मानसिंह भी अखाड़े के पहलवान रहे हैं। इसके बाद पिता महावीर सिंह फोगाट और हम सात बहनों ने कुश्ती सीखी। मेरी मां को भी पिताजी ने कुश्ती शुरू करने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। वरना मां भी कुश्ती जगत में नामचीन पहलवान होती।
राजस्थान में काफी हुनर
द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता महावीर सिंह फोगाट ने कहा कि यूं तो हरियाणा-पंजाब में कुश्ती काफी लोकप्रिय रही है, लेकिन राजस्थान में हुनर कमी कमी नहीं है। इसीलिए फोगाट परिवार ने अजमेर से प्रदेश में एकेडमी खोलने की शुरूआत की है। हमारे कोच कुश्ती, तीरंदाजी, शूटिंग और अन्य खेलों का प्रशिक्षण देंगे। संस्कृति स्कूल में हम बेहतरीन कोच और सुविधाएं देंगे। हम चाहते हैं, कि २०२४ के ओलंपिक गेम्स में भारत विभिन्न खेलों में स्वर्ण पदक जीते।
बन सकती है पांच दंगल
दंगल फिल्म में कोच और गीता-बबीता की कहानी से जुड़े सवाल पर महावीर सिंह ने कहा कि वो तो मेरे और परिवार की कहानी का एक चौथाई हिस्सा भी नहीं है। पूरी जिंदगी का संघर्ष, जी-तोड़ मेहनत और कई घटनाएं जोड़ी जाएं तो दंगल जैसी पांच फिल्म और बन सकती हैं। कुश्ती और अन्य खेलों में जो कॅरियर बनाना चाहता है, फोगाट एकेडमी उसे तराशेगी।
Published on:
23 Apr 2018 08:29 am
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