12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Danger: पशु-पक्षियों को मानव ने पहुंचाया सबसे ज्यादा नुकसान

अगर पशु-पक्षियों का विनाश हुआ तो मनुष्य भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा।

2 min read
Google source verification
birds disturb

birds disturb

अजमेर. अंधाधुंध विकास, प्रदूषण एवं बढ़ती मानवीय गतिविधियों से पूरी दुनिया में पक्षियों का जीवन खतरे में है। पक्षियों के प्रजनन, व्यवहार, प्रवास और खान-पान में बदलाव इसका संकेत है। अगर पशु-पक्षियों का विनाश हुआ तो मनुष्य भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा। यह विचार महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में शुरु हुए वार्षिक सम्मेलन में सामने आए।

Read More: Corona Virus :कोरोना वायरस के खौफ से अलर्ट मोड पर तीर्थ नगरी पुष्कर

पर्यावरण विज्ञान विभाग के तत्वावधान में पक्षी व्यवहारिकी पर संगोष्ठी और इथेलॉजिकल सोसायटी के 43 वें वार्षिक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कई मुद्दों पर चर्चा की। मुख्य अतिथि डॉ. डी.पी.एस. वर्मा ने कहा कि 19 वीं शताब्दी के शुरुआत में अकाल से पशु-पक्षियों की प्रजातियों को नुकसान पहुंचा। अनियंत्रित औद्योगिक क्रांति से महासागर, नदियां-झील तालाब तक प्रदूषण की चपेट में हैं। 2004 में सुनामी का पहला अंदेशा पक्षियों को हुआ था। वास्तव में पक्षी पर्यावरण हलचल और विषम परिस्थितियों को भांपते हैं।

Read More: HOLI 2020 : रंग मत डारे रे सांवरिया म्हारो गुर्जर मारे रे...

इथेलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. एस. फैजी ने कहा कि दुनिया भर में पक्षियों का प्रवास होता है। राजस्थान की भरतपुर सेंचुरी, सांभर झील तो पक्षियों के पसंदीदा घर हैं। सांभर में प्रवासी पक्षियों की त्रासदी बढ़ती मानवीय हलचल और प्रदूषण का संकेत है। जर्मनी के अंतर्राष्ट्रीय वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. बुकहार्ड विल्सके ने कहा कि दुनिया भर में प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं। इन्हें बचाना चुनौती है। संरक्षित सूची में शामिल देशी-प्रवासी पक्षियों पर हमें ध्यान देने की जरूत है। गोडावण, गौरेया, साइबेरियाई सारस, खरमौर का सिमटना अंधाधुंध विकास अवधारणा का प्रतीक है।

Read More: URS 2020 : पाकिस्तानी जत्थे ने लगाई गरीब नवाज के दर पर हाजरी

कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने कहा कि मानव सभ्यता के विकास में प्रथम अध्ययन पशु-पक्षियों पर होता है। जानवर स्वयं अपना संरक्षण और बचाव जानता है। वन और जैव संपदा को मानव ने ही सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है। इससे पहले संयोजक प्रो. प्रवीण माथुर ने स्वागत किया। डॉ. वी. वी. बिनॉय ने धन्यवाद दिया। संचालन डॉ. ऋतु माथुर ने किया।

तकनीकी सत्रों में डॉ. टी.के.रॉय, डॉ. विवेक शर्मा, मांगीलाल, डॉ. अंबिका, प्रो. अशोक पुरोहित, डॉ. एच.एस. गहलोत, कुशालपुर भट्टाचार्य, डॉ. राजेंद्र सिंह, सुनील कुमार, आर के ज्योति मुखर्जी, रजनी बारले और अन्य ने पत्रवाचन किए।

Read More: सरवाड़ में मिनी उर्स का नजारा- फूल-चादर पेश कर मांग रहे खुशहाली की दुआ