
anasagar lake
रक्तिम तिवारी/अजमेर. प्राकृतिक सुंदरता और पक्षियों की पसंदीदा आश्रय स्थल माने जाने वाली आनासागर झील पर खतरा (Danger) मंडरा रहा है। इसके कई इलाकों में जलकुम्भी (Hyacinth)लगातार दिखाई देती है। यही स्थिति रही तो एक खूबसूरत झील जल्द बर्बादी के कगार पर पहुंच सकती है।
आनासागर झील में बांडी नदी, गौरव पथ, पुष्कर रोड और आसपास के इलाके में जलकुम्भी अक्सर दिखाई देती है। ऊपर से सफाई के बावजूद इसका पानी के भीतर फैलाव हो रहा है। कई मर्तबा यह टापू और झील के बीचों-बीच नजर आती है। जलकुंभी को कॉमन वाटर हायसिंथ (नीला शैतान) कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम (इकॉरनीय प्रेसिपस) भी है। मूलत: यह दक्षिणी अमरीका की अमेजन नदी के किनारे पाया जाता था। वहां से अंग्रेज इसको सजावटी पौधे के रूप में भारत में लाए। तबसे यह देश के विभिन्न राज्यों, शहरों और गांवों तक पैर पसार चुका है।
महज 10 दिन में होती दोगुना
मदस विवि के बॉटनी विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद पारीक ने बताया कि जलकंभी (Hyacinth)एक जलीय पादप है। यह अनुमानत: 10 दिन में अपनी संख्या दोगुनी कर लेती है। इसे पानी से आसानी से हटाया नहीं जा सकता है। जलकुंभी जिस भी झील (anasagar lake), तालाब और जलाशयों में फैलती है, उनका पानी तेजी से वाष्पित होता है।
घटती है पानी में ऑक्सीजन
पर्यावरण विज्ञान के गेस्ट फेकल्टी डॉ. विवेक शर्मा के अनुसार जलकुंभी (Hyacinth) जलाशय में घुली ऑक्सीजन गैस का भी उपभोग तेजी से करता है। इससे संबंधित झील, तालाब की उपस्थिति से जलीय जीव-जंतुओं के लिए ऑक्सीजन (oxygen level) की मात्रा घट जाती है। जीव-जंतुओं की मृत्य होने के साथ-साथ जल की गुणवत्ता कम हो जाती है।
आनासागर में जलकुंभी के खास कारण......
मछली पालन (fishiry) और अन्य कार्यों में लगे ठेकेदार आनासागर झील को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुछ लोग जलकुंभी लाकर डालते हैं। इससे पानी और जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंच रहा है।
-झील में बांडी नदी और 13-14 नालों से पानी पहुंचता है। बजरी और अन्य सामग्री पानी के साथ आनासागर में पहुंच रही है। इसके चलते जलकुंभी को फैलने का अवसर मिल रहा है।
-आनासागर की सफाई के लिए डीविडिंग मशीन चलती है। इससे ऊपरी तौर पर सफाई हो जाती है। लेकिन जलकुंभी को समूल नष्ट नहीं किया जा रहा है।
Published on:
28 Jan 2022 08:00 am
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