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आरोपी टुंडा व अन्य के मामले में अदालत में फैसला 10 अप्रेल को
- ट्रेन बम विस्फोट प्रकरण :
तीस साल पुराने मामले की बहस तीन दिन में पूरीअजमेर. अयोध्या में विवादित ढ़ांचा ढहाए जाने की पहली बरसी पर देश के कई नगरों में एक साथ हुए बम विस्फोट का तकरीबन 30 साल पुराने मामले में अब फैसले की घड़ी आ गई है। प्रकरण में बम बनाने के मास्टर माइंड आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा व अन्य आरोपी हैं। डेजिग्नेटेड कोर्ट ऑफ राजस्थान (टाडा कोर्ट) में बुधवार को बचाव पक्ष की बहस भी पूरी हो गई। प्रकरण में दोनों पक्षाें ने अपनी बहस मात्र तीन दिन में पूरी कर दी, जबकि प्रकरण में 66 गवाह व 400 से अधिक दस्तावेज परीक्षित कराए गए। अदालत ने अब फैसला सुनाने के लिए 10 अप्रेल की तारीख तय की है।
अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य व गवाहों के आधार पर आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की, वहीं बचाव पक्ष ने विधिक प्रावधानों की पालना नहीं करने व कड़ी से कड़ी नहीं मिलने की बात कही।प्रकरण के तथ्य
6 दिसम्बर 1993 को देश के कई शहरों में सीरियल ट्रेन बम धमाके हुए थे। बड़ौदा, कोटा के आमली स्टेशन, कानपुर व हैदराबाद स्टेशनों पर यह धमाके हुए। इनमें कई जानें गईं व सैंकड़ों लोग हताहत हुए थे। इसकी जांच सीबीआई ने की। मामले में यूपी निवासी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा व उसके सहयोगी हमीदुद्दीन व इरफान को आरोपी बनाया। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गए। आरोपी टुंडा को वर्ष 2014 में नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया। इसी प्रकार वर्ष 2016 में आरोपी इरफान व 2018 में आरोपी हमीदुद्दीन को गिरफ्तार किया। तभी से आरोपियों की सुनवाई अजमेर िस्थत टाडा कोर्ट में चल रही है।
तीन दिन में हुई पूरी बहसजानकारी के अनुसार प्रकरण में 20 मार्च से अंतिम बहस शुरू हो गई। सीबीआई के विशेष वकील भवानी सिंह रोहिल्ला ने सीबीआई का पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष की ओर से 66 गवाह व 400 दस्तावेज पेश किए गए। इसके बाद मंगलवार से बचाव पक्ष की बहस वकील अब्दुल रशीद व शफकत उल्लाह सुल्तानी ने की। बचाव पक्ष की बहस बुधवार को पूरी हो गई।
इन कानूनों में है प्रकरण दर्ज
भादंस - धारा 302, 307, 324, 435, 120 बी.
विस्फोटक पदार्थ अधिनियम - धारा 3 व 4
- सार्वजनिक संपत्ति (हानि) निवारण अधिनियम - धारा 3 व 4.
- आर्म्स एक्ट व रेलवे एक्ट की विभिन्न धाराएं
Published on:
22 Mar 2023 11:03 pm
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