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video : दिन ब दिन जमींदोज होती हमारी विरासतें – सार-संभाल की ओर नहीं ध्यान
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video : दिन ब दिन जमींदोज होती हमारी विरासतें – सार-संभाल की ओर नहीं ध्यान

दिन ब दिन जमींदोज होती हमारी विरासतें झड़ता चूना और निकलते पत्थर पुरानी विरासत की सार-संभाल की ओर नहीं ध्यान    
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किशनगढ़ की स्थापना हुए 400 वर्ष से अधिक हो गए है। वर्ष 1611 में तत्कालीन शासक किशनसिंह ने किशनगढ़ की स्थापना की थी। तब से लेकर क्षेत्र में बहुत से भवनों, छोटे गढ़ों, तिबारियों आदि का निर्माण हुआ। परंतु समय के साथ यह उपेक्षित होते गए और इनके रखरखाव की ओर ध्यान नहीं देने के कारण यह जर्जर होते जा रहे है। उस समय चूने से बने इन भवनों का चूना झड़ रहा है और एक के बाद एक पत्थर निकलते जा रहे है। किशगनढ़ में विरासत की उपेक्षा का दर्द मिटाने के लिए बड़ी पहल की आवश्यकता है। किशनगढ़ की प्राचीन विरासत को संभालने की ओर किसी का ध्यान नहीं है। चार सौ वर्ष से प्राचीन इस नगर में बहुत से सार्वजनिक एवं निजी भवन 100 वर्ष से अधिक प्राचीन है। इतने पुराने भवनों का वैज्ञानिक ढंग से रखरखाव होना तो दूर सामान्य रखरखाव का भी अभाव है। उपेक्षा की मार झेलते इन भवनों का चूना दिन ब दिन झड़ रहा है और पत्थर निकलते जा रहे है। उपेक्षा और रखरखाव की स्थिति बनी रही तो कई पुराने भवनों का अस्तित्व मिट जाएगा। पहले भी कई ावनों का अस्तित्व मिट चुका है।


मिट गई कई हवेलियां नगर के पुराने एवं नए शहर में कई प्राचीन हवेलियां स्थित है। पुरानी वास्तुशैली की जानकारी देने और कई चौक बाली इन हवेलियों का अस्तित्व मिट चुका है। कई हवेलियों को जर्जर होने के कारण गिराना पड़ा है। अब भी कई भवनों की यही स्थिति है अगर जल्द ही इन ावनों और स्थानों का रखरखाव नहीं किया गया तो यह भी धराशायी हो जाएंगे। वहीं कई अवैध निर्माण और अतिक्रमण की चपेट में आ गए है। रखरखाव की जरूरत नगर के प्राचीन परकोटे सहित आसपास बने छोटी गढिय़ों, भवनों, तिबारों सहित अधिकतर प्राचीन निर्माण बहुत अधिक उपेक्षित स्थिति में है। नया शहर बाल हनुमान मंदिर चौबुर्जा के पास पुराने परकोटे का हिस्सा धीरे-धीरे धराशयी होता जा रहा है। इसी तरह बंद पड़े राजकीय महाराजा उच्च प्राथमिक भवन की दीवारों पर पेड़ उगे हुए है। इसकी दीवारों के पत्थर निकल आए है। मुय मार्ग पर होने के कारण हादसों की भी आशंका बनी रहती है।

 

नगर के नया शहर क्षेत्र में रिसाला भवन स्थित है। यहां घुड़सवार सैनिक घोड़ों को बांधा करते थे। आजादी के बाद कई वर्षों तक घुड़सवार पुलिस यहां तैनात रही थी। धीरे-धीरे यह जर्जर होता गया। इसके एक ओर की दीवार गिर भी चुकी है। जर्जर होते जा रहे प्राचीन भवन की सार-संभाल नहीं की गई तो यह भी मिट जाएगा। किशनगढ़-उदयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित उदयपुर कला गांव के पास पुराना बांध बना हुआ है। यहां तक जाने का मार्ग कच्चा है और बांध के पास बने पुराने कक्ष भी उपेक्षित स्थिति में है। पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा किशनगढ़ की इस प्राचीन विरासत की उपेक्षा समाप्त कर मरात और रखरखाव की ओर ध्यान दिया जाए तो इसका इतिहास दमकने लगेगा। इसके साथ ही कई रमणीक स्थानों का जीर्णोद्धा होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।