चन्द्र प्रकाश जोशी
अजमेर. लावारिस की जिन्दगी जीने को मजबूर एक महिला की तबियत बिगड़ी तो वहीं रहने वाले एक दम्पती उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। भगवान ने यहां भी दम्पती की परीक्षा ली। अस्पताल की चौखट से चिकित्सक कक्ष और फिर एक्सरे कक्ष तक खुद को ट्रोली खींचनी पड़ीं। ना कोई वार्ड बॉय आया ना कार्मिक, जिसने भी देखा तो मुंह फेर लिया। बुजुर्ग दंपती की भी बिगड़ती हालात व हांफते देख पत्रिका ने पहल दिखाई और एक्सरे जांच ही नहीं पुन: चिकित्सक को दिखवाने में मदद की। इस तरह की घटनाएं अस्पताल में दम तोड़ती संवेदनाओं के लिए पर्याप्त हैं।
शहर के दरगाह क्षेत्र में लावारिस रहने व फुटपाथ पर गुजारा करने वाली मुन्नी बाई (70) की शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। वहीं रहने वाली सैयद मजहर (62) एवं उनकी पत्नी फरहाना ने तडफ़ती मुन्नी बाई को देखा तो वे फौरन जवाहर लाल नेहरू अस्पताल लेकर पहुंच गए। गाड़ी से उतारने के लिए वार्डबॉय ना कोई कार्मिक। वृद्ध दम्पती ने परिसर में रखे स्ट्रेचर-ट्रॉली को खींचा और उस पर लेटाकर आपातकालीन इकाई में पहुंच गए। चिकित्सक ने जांच कर एक्सरे करवाने की बात कही। यहां भी हार्टपेशेन्ट सैयद मजहर व उनकी पत्नी ट्रॉली में मुन्नी को लेटाकर एक्सरे जांच के लिए रवाना हो गए। बीच गैलरी में ट्रोली खींचते हार्ट पेशेन्ट मजहर की सांसें फूल गई, मुंह से बोला नहीं जा रहा। पत्रिका प्रतिनिधि ने जब कुछ जानकारी ली तो बताया कि यह लावारिस थी मदद के लिए लाए हैं, यहां किसी की मदद नहीं मिल रही है। उनकी बिगड़ती तबीयत देख पत्रिका प्रतिनिधि ने पहल की और स्ट्रेचर को खींच कर एक्सरे कक्ष तक पहुंचाया। यहां जांच की पर्ची को लेकर तकनीशियन ने बुजुर्ग को फिर लौटाया, बाद में जांच करवाकर मौके पर रास्ते में मिले वार्ड बॉय को बुजुर्ग दम्पती की मदद का कहने पर वह साथ लगा। बुजुर्ग दम्पती ने पत्रिका को मदद के लिए शुक्रिया अदा किया।
Read More : क्या आपके डॉक्टर दवा का कार्टेन अंद बीमार हैं जोर रखा है?
संवेदनाएं मर रहीं या काम का दबाव!
इस तरह की घटनाएं अस्पताल में भले ही प्राय: देखने को मिलती हो मगर आखिर इसकी वजह क्या है? या तो कार्मिकों की संवेदनाएं मर रही हैं या फिर काम का दबाव कुछ वार्डबॉय या कार्मिकों पर ही है। काश! अस्पताल प्रशासन इस तरह की घटनाओं को देख व्यवस्थाएं समय रहते दुरुस्त कर पाएं।