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#election 2018: चाहे कांग्रेस या बीजेपी की रही सरकार, अपना अजमेर सबमें भागीदार

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ajmer represntation in govt

ajmer represntation in govt

अजमेर.

प्रदेश में भले ही सत्ता एक बार कांग्रेस एक बार भाजपा के पास रही हो, लेकिन दोनों ही पार्टियों की अजमेर जिले की सत्ता में भागीदारी रही है। यूपीए 2 और वर्तमान एनडीए सरकार में भी अजमेर को प्रतिनिधित्व मिला था। पिछले 50 सालों से अधिकतर सरकारों में जिले को प्रतिनिधित्व मिला।

पूर्व मंत्री जसराज जयपाल ने बताया कि 1967 में जब वे मंत्रिमंडल में थे। उस दौरान मंत्रिमंडल में बालकृष्ण कौल, हरिभाऊ उपाध्याय, राव नारायण सिंह मसूदा, प्रभा मिश्रा भी मंत्रिमंडल में थे। इसी प्रकार 1980 में भगवती देवी जिले से मंत्री रहीं। उन्होंने जगन्नाथ पहाडिय़ा और शिवचरण माथुर दो-दो मुख्यमंत्रियों के साथ कार्य किया। इसके बाद आई कांग्रेस की सरकार में ललित भाटी को उपमंत्री बनाया गया। उस समय वे मंत्रिमंडल के सबसे युवा सदस्य थे।

बोफोर्स मामले के बाद रणनीति के तहत शिवचरण माथुर के मंत्रिमंडल ने इस्तीफा दे दिया। चुनाव के कुछ माह पहले हरिदेव जोशी को मुख्यमंत्री बनाया गया। उनके मंत्रिमंडल में जिले से नीलिमा शर्मा, सुरेश सिंह और माणक डाणी को जगह मिली। इसके बाद रही भाजपा की भैरोसिंह शेखावत की सरकार में सांवरलाल जाट और श्रीकिशन सोनगरा मंत्रिमंडल में रहे।

मिला केबिनेट में भी स्थान

वर्ष 1998 में बनी कांग्रेस की सरकार में अजमेर उत्तर से जीते किशन मोटवानी को राजस्व और नसीराबाद से जीते गोविंद सिंह गुर्जर को पंचायतराज मंत्री बनाकर केबिनेट में लिया गया। वर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पहले कार्यकाल में सांवरलाल जाट को सिंचाई विभाग देकर केबिनेट में लिया गया। वहीं वासुदेव देवनानी को राज्यमंत्री बनाया गया।

विष्णु मोदी को अंतर राज्य जलविवाद परिषद में स्थान देकर मंत्री का दर्जा दिया। वहीं संगठन में रहे ओंकार सिंह लखावत को राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्रधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2008 में कांग्रेस फिर सत्ता में आई। पुष्कर से जीतीं नसीम अख्तर को राज्यमंत्री, ब्रह्मदेव कुमावत को संसदीय सचिव बनाया गया।

वर्तमान सांसद और तत्कालीन केकड़ी विधायक रघु शर्मा को विधानसभा में उपमुख्य सचेतक बनाया गया। इसके बाद 2013 फिर वसुंधरा राजे की सरकार में वासुदेव देवनानी को शिक्षा राज्यमंत्री व अनिता भदेल को महिला व बाल विकास विभाग का राज्यमंत्री, सुरेश सिंह रावत और शत्रुघ्न गौतम को संसदीय सचिव बनाया गया।

सांसद बनने से पहले सांवरलाल जाट जल संसाधन विभाग के मंत्री रहे। बाद में उन्हें केन्द्र में जल संसाधन राज्यमंत्री भी बनाया गया। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने इस्तीफा दे दिया लेकिन सरकार ने बाद में उन्हें फिर किसान आयोग का अध्यक्ष बनाकर मंत्री का दर्जा दिया। ओंकार सिंह लखावत को पुन: राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया।

तीन सरकारों से शिक्षा मंत्रालय अजमेर के पास

प्रदेश में वर्ष 2003 में बनी भाजपा सरकार में अजमेर उत्तर से जीते वासुदेव देवनानी को शिक्षा राज्यमंत्री बनाया गया, हालांकि केबिनेट मंत्री घनश्याम तिवाड़ी थे। वर्ष 2008 में आई कांग्रेस सरकार में पुष्कर विधायक नसीम अख्तर शिक्षा राज्यमंत्री रहीं, तब केबिनेट मंत्री भंवरलाल मेघवाल थे। वर्ष 2013 में आई भाजपा सरकार में वासुदेव देवनानी दुबारा शिक्षा राज्यमंत्री बने, इस बार उन्हें स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया।

शेखावत व राजे की सरकार में तीन बार मंत्री रहे जाट

मंत्री बनने के मामले में भारतीय जनता पार्टी के सांवरलाल जाट भाग्यशाली रहे। वे भाजपा की तीनों सरकारों में सत्ता में भागीदार रहे। उन्होंने भैरोसिंह शेखावत व वसुंधरा राजे के साथ कार्य किया।