2 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान में यहां डेढ़ माह के शिशु के पेट से निकाला भ्रूण, जानें हैरान करने वाला मामला

जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के पिडियाट्रिक सर्जरी विभाग में करीब डेढ़ माह के नवजात बच्चे के पेट में विकसित हुए भ्रूण को सफल ऑपरेशन कर बाहर निकाला गया।

2 min read
Google source verification
surgery.jpg

अजमेर। जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के पिडियाट्रिक सर्जरी विभाग में करीब डेढ़ माह के नवजात बच्चे के पेट में विकसित हुए भ्रूण को सफल ऑपरेशन कर बाहर निकाला गया। यह जुड़वां बच्चे के रूप में विकसित होने की बजाय गर्भ में ही गांठ के रूप में तब्दील भ्रूण शिशु के पेट में विकसित हो गया, हालांकि उसमें जान नहीं थी।

पीडियाट्रिक सर्जन एवं प्रोफेसर डॉ. गरिमा अरोड़ा ने बताया कि अजमेर की निवासी गर्भवती महिला की सोनोग्राफी जांच के दौरान शिशु के पेट में गांठ नजर आई। उन्होंने महिला को प्रसव तक इंतजार करने को कहा। प्रसव के बाद परिजन ने नवजात को लेकर उनसे संपर्क किया।

नवजात शिशु के पेट में गांठ के चलते सूजन भी थी, जिसकी सीटी स्कैन, एमआरआई जांच करवाई गईं, जिसमें शिशु के पेट में भ्रूण की पुष्टि हुई, जिसमें जान तो नहीं थी मगर गांठ के रूप में आकार बढ़ रहा था। इसके बाद नवजात का ऑपरेशन कर गांठ निकाली गई। भ्रूण करीब 12 से 14 सप्ताह का था। यानी करीब 3 माह का भ्रूण शिशु के पेट में ही विकसित हो गया।

परजीवी जुड़वां केस
डॉ. गरिमा के अनुसार इसे कंडीशन फिटेशन एंड फीटो या पेरासिटिक ट्विन्स (परजीवी जुड़वां) कहते हैं। महिला के गर्भ में जुड़वां बच्चे होते हैं जो खून की सप्लाई को दोनों आपस में बांटते हैं। कुछ केस ऐसे होते हैं जिसमें जो भ्रूण स्ट्रॉंग होता है वह खून की सप्लाई को खींच लेता है। इससे दूसरा भ्रूण विकसित नहीं हो पाता है। ऐसे में बच्चे शरीर से भी जुड़े हो सकते हैं या पेट में गांठ के रूप में विकसित हो सकते हैं। पूरी दुनिया में ऐसे 200 से 250 केसेज होते हैं।

जान नहीं, मगर शरीर के अंग विकसित
शिशु के पेट में विकसित भ्रूण में जान नहीं थी, लेकिन उसके हिप्स, हाथ एवं सिर ने आकार ले लिया था। अंदर से ग्रोथ लगभग रुक गई थी।

इनका कहना है...
अजमेर संभाग में ऐसा पहला मामला सामने आया है। ऑपरेशन के बाद नवजात शिशु अब ठीक है।
- डॉ. गरिमा अरोड़ा, प्रोफसर पिडियाट्रिक सर्जरी, जेएलएनएच अजमेर