19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Good News: अजमेर में दिखेंगे आपको शानदार हर्बल और मेडिसेनिल प्लांट

लगेंगे प्राकृतिक एवं औषधीय महत्व के पौधे । शोधार्थियों और विद्यार्थियों को विभिन्न प्रजातियों के पौधों की जानकारी मिल सकेगी।

2 min read
Google source verification
botonical garden

botonical plants in mdsu,botonical plants in mdsu,botonical garden

अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में 20 साल से उजाड़ पड़े बॉटनीकल गार्डन की दशा जल्द सुधरने के आसार हैं। बॉटनी विभाग और प्रशासन ने गार्डन को आबाद करने की योजना बनाई है। यहां कई प्राकृतिक और औषधीय महत्व के पौधे लगाए गए हैं। शोधार्थियों और विद्यार्थियों को विभिन्न प्रजातियों के पौधों की जानकारी मिल सकेगी।

वर्ष 1987 में गठित विश्वविद्यालय में कुलपति निवास के पिछवाड़े बॉटनीकल गार्डन बनाया गया। बॉटनी विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रो. एस. के. महाना के कार्यकाल में कुछेक पौधे भी लगाए गए। लेकिन पथरीली जमीन होने का तर्क देकर प्रशासन ने गार्डन को आबाद करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। वक्त के साथ गार्डन बदहाल हो गया।

कागजों में दब गई योजना
इसी दौरान वर्ष 2005 में तत्कालीन जल संसाधन मंत्री स्व. सांवरलाल जाट ने करीब 1 करोड़ रुपए की लागत से यहां बॉटनीकल और हर्बल गार्डन बनाने की योजना का शिलान्यास किया। यहां वनस्पति और औषधीय महत्व के पौधे, ग्रीन हाउस बनाना प्रस्तावित हुआ। इसके अलावा खेजड़ी, थोर और राजस्थान के अन्य पौधे लगाने पर भी विचार हुआ। लेकिन योजना कागजों में ही दफन हो गई।

9 साल शिक्षक विहीन रहा विभाग
बॉटनी विभागाध्यक्ष प्रो. महाना के 2009 में सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग भी बदहाल हो गया। यह कभी फूड एन्ड न्यूट्रिशियन विभाग तो कभी गेस्ट फेकल्टी के भरोसे संचालित रहा। बीते साल प्रो. अरविंद पारीक की नियुक्ति हुई। इसके बाद से विभाग को संजीवनी मिली है।

बनाई गार्डन को संवारने की योजना
बॉटनी विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद पारीक ने बरसों से उजाड़ बॉटनीकल गार्डन को संवारने की योजना बनाई है। यहां प्राकृतिक और औषधीय महत्व के पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा राजस्थान एवं अन्य में प्रांतों में पाए जाने वाले विशेष पौधे भी लगाए जाएंगे। विभाग ने यूजीसी को भी इसका प्रस्ताव भेजा है। बॉटनीकल गार्डन तैयार होने के बाद यहां विद्यार्थी और शोधार्थी शोध कर सकेंगे।