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सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद यहाँ सरकार करवा रही है यह अवैध कार्य जानें क्या है यह पूरा मामला

अवैध खनन पर नहीं लग रहा अंकुश, दाम ज्यादा, लेकिन मिल रही है बजरी, प्रभावी कार्रवाई की दरकार

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Government Construction despite the ban on gravel

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद यहाँ सरकार करवा रही है यह अवैध कार्य

अजमेर. सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद अवैध खनन कर लाई जा रही बजरी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। यही कारण है कि अधिकांश निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है। इसमें वे निर्माण कार्य भी चालु है, जो सरकारी विभागों की ओर से करवाए जा रहे है। रोक के बावजूद बजरी मिलने में कोई परेशानी नहीं हो रही है, लेकिन इसके दाम ज्यादा चुकाने पड़ रहे है। ऐसा नहीं है कि इस बात की जानकारी खनिज, परिवहन विभाग, पुलिस व प्रशासन को नहीं है लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा।

बजरी पर रोक का अजमेर सहित जिले भर में निजी मकानों, बहुमंजिला इमारतों सहित अन्य निर्माण कार्य पर ज्यादा असर नहीं हुआ। यहां तक कि सरकार की एजेन्सियां अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, सार्वजनिक निर्माण विभाग, पंचायती राज विभाग, जलदाय विभाग की ओर से संवेदकों के माध्यम से निर्माण कार्य करवाए जा रहे है। इसमें सड़क निर्माण हो या नाली निर्माण, भवन निर्माण हो या अन्य निर्माण। इन सभी कार्यों को करने के लिए बजरी की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद बजरी के कारण बड़े स्तर पर होने वाले निर्माण कार्य थम सा गए लेकिन अधिकांश निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है। इन निर्माण कार्य के लिए बजरी ज्यादा दाम पर मिल रही है और यही कारण है कि ये कार्य बंद नहीं हुए। शहर के विभिन्न हिस्सों में चल रहे निर्माण कार्य को देखकर इस बात का अन्दाज लगाया जा सकता है।

कहां से आ रही बजरी ?

शहर के सुभाष उद्यान और लवकुश उद्यान तथा चौपाटी के निर्माण कार्य में बजरी का उपयोग नियमित किया जा रहा है। यहां पर रोक के बावजूद बजरी देखी जा सकती है। यहां पर न केवल बजरी का उपयोग बेरोक-टोक हो रहा है बल्कि यहां पर बजरी के ढेऱ भी लगे है। रोक के बावजूद बजरी कहां से आई, यह संवेदक भी जानता है और सरकारी मशीनरी भी। लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।

खानापूर्ति तक सीमित कार्रवाई

बजरी के खनन पर रोक है और बजरी को लेकर पुलिस, परिवहन, खनिज विभाग की ओर से कार्रवाई भी की जाती है लेकिन यह कार्रवाई खानापूर्ति तक ही सीमित रहती है। इसका अन्दाज शहर में बजरी से भरी सरपट दौड़ती ट्रेक्टर ट्रोलियों को देखकर लगाया जा सकता है। जानकारों का मानना है कि प्रशासन टीमों का गठन कर नियमित रूप से इन पर निगाह रखें तो ही इस पर अंकुश लग सकता है।

देखकर भी अनजान प्रशासन

रोक से पहले शहर में गिनी चुनी जगहों पर ही बजरी का स्टॉक किया जाता था लेकिन एक ही जगह पर बड़ा ढेऱ नहीं करने की पृवति के चलते अब तो शहर में जगह जगह बजरी के छोटे छोटे ढ़ेर लगे है। यहां पर रात के समय डम्पर खाली होते है और दिन के समय ट्रेक्टर ट्रालियों में भरकर बजरी बेची जाती है, लेकिन प्रशासन देखकर भी अनजान बना बैठा है और इन बजरी माफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।