
Rbsk मासूमों के चेहरे पर लौटी खुशी, दिल के रोग से दिलाई निजात
अजमेर. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम गरीब परिवारों के बच्चों का जीवन रक्षक बन गया है। अजमेर के मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में हाल ही 3 साल की लक्ष्मी, 8 साल की कोमल, 14 साल की पायल और 12 साल के दिल खुश के दिलों के जन्मजात रोगों का नि:शुल्क इलाज किया गया। ये सभी बच्चे अब अन्य बच्चों की तरह अपना आगे का जीवन हंसते, मुस्कराते, खेलते-कूदते कुशलता से जीने को तैयार हैं। मित्तल हॉस्पिटल के हृदय एवं शिशु रोग विभाग के दक्ष एवं अनुभवी चिकित्सा विशेषज्ञों की पूरी टीम जिनमें हार्ट एंड वास्कुलर सर्जन डॉ.सूर्य, बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत माथुर एवं डॉ सुनील गोयल, कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट एवं इन्टेन्सिविस्ट डॉ धर्म चंद जैन ने इन बच्चों की तकलीफ ों का सफ लता से निदान किया।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. रामलाल चौधरी ने बताया कि आरबीएसके का अब तक संभाग के 160 गरीब परिवारों के बच्चों को लाभ पहुंचाया जा चुका है। कुछ और भी बच्चे चिह्नित हैं जिनके परिवारजन से आरबीएसके की टीम समझाइश कर रही है। शीघ्र ही उन्हें भी सरकार की इस योजना का लाभ पहुंचाकर बच्चों का जीवन सुरक्षित किया जाएगा।
डॉ. चौधरी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि पंसद नगर कोटड़ा निवासी भगवान सिंह की बेटी 3 वर्षीय लक्ष्मी के एक नहीं बल्कि दिल की जन्मजात दो तकलीफें थी। शल्य चिकित्सा कर उसके दिल का छेद बंद किया और वाल्व रिपेयर किया गया। लक्ष्मी अब पूर्णरूप से स्वस्थ्य है और उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के दिन भगवान सिंह के घर स्वस्थ लक्ष्मी के रूप में खुशी लौटी है, इससे परिवारजन बेहद प्रसन्न हैं। इस मौके पर मित्तल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. दिलीप मित्तल, मनोज मित्तल, वाइस प्रेसीडेंट श्याम सोमानी से भी उन्होंने भेंट की। अतिरिक्त जिला नोडल अधिकारी आरबीएसके डॉ. रामकृपाल लखावत, एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. सुरेश चौधरी भी उनके साथ थे।
वहीं तारागढ़ निवासी भगवान सिंह की 8 साल की बच्ची कोमल भी मित्तल हॉस्पिटल में उपचाररत है। कोमल को भी जल्द ही छुट्टी दी जाएगी। भगवानपुरा बनेड़ा भीलवाड़ा निवासी उदा गुर्जर के 12 वर्षीय पुत्रदिलखुश को थी। इन दोनों पीडि़त बच्चों के हृदय की झिल्ली का उपयोग करते हुए अलिंदों को रिपेयर किया गया। वहीं गगवाना निवासी अशोक पहाडिय़ा की 14 वर्षीय बेटी पायल जन्मजात दिल में छेद की तकलीफ से पीडि़त थी। जिले मित्तल हॉस्पिटल में रैफर किया गया।
Published on:
15 Jan 2020 12:06 am
