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अजमेर.शहर city व पैराफेरी क्षेत्र में विकास करने के लिए जिम्मेदार development work अजमेर विकास प्राधिकरण ada की माली हालत economic condition खस्ता है। हालत यह हैं सरकार का बकाया चुकाने के लिए एडीए अब अपनी तीन करोड़ रुपए की एफडी तुड़वाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए फाइल कमिश्नर को भेजी गई है। प्राधिकरण को सरकार का करीब लाखों रुपए का भुगतान करना है। एडीए के पास केन्द्रीय योजनाओं का 2200 लाख रुपए रिजर्व है। अफोर्डेबल योजना का 5.50 लाख रुपए है। विजयाराज योजना का 2200 रुपए एचडीएफसी बैंक में है। यह राशि केवल इन योजनाओं में ही खर्च की जा सकती है। 102 लाख रुपए पीडी खाते में जमा हैं। 850 लाख रुपए एफडीआर है। एडीए प्रतिमाह अपने कर्मचारियों के वेतन,पेंशन व कार्यालय व्यय पर 1.20 करोड़ रुपए खर्च करता है। एडीए भूखंडों की नीलामी कर कर्मचारियों की तनख्वाह निकाल रहा है। योजनाओं का विकास अटकाएडीए की खस्ता हालत के चलते वर्षो पुरानी पृथ्वीराज नगर योजना, डीडी पुरम, पंचशील ई-ब्लॉक, महाराणा प्रताप नगर योजना का विकास अटका हुआ है। भूखंडों की नीलामी भी प्रभावित है। एडीए ने कई नई योजनाओं का प्रस्ताव भी बनाया है लेकिन ये अभी पाइप लाइन में ही हैं। नियमन कार्य ठप हैं। इससे एडीए का खजाना भरता है।
उप निदेशक ने लिया रैन बसेरों का जायजाव्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश
अजमेर.स्थानीय निकाय विभाग की उप क्षेत्रीय निदेशक अनुपमा टेलर ने शहर में नगर निगम की ओर से संचालित किए जा रह रैन बसरों का निरीक्षण का व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टेलर ने अधिकारियों कर्मचारियों को व्यवस्था में सुधार करने तथा रैन बसेरों की लोकशन का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए जिससे जरूरतमंद लोग इनमें आश्रय लेकर ठंड से बचाव कर सकें। उप निदेशक के साथ नगर निगम के अधिकारी भी उपस्थित थे। उप निदेशक ने जनाना अस्पताल में बनाए गए आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। इसके अलावा दिल्ली गेट, कोटड़ा, जेएलएन अस्पताल, आजाद पार्क में बनाए गए रैन बसेरे का जायजा लिया।
Published on:
02 Jan 2020 05:00 pm
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