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Human Angle-बिखरे हुए सपने : दो मासूम बहनों से छिना परिवार का प्यार

ब्यावर के जवाजा का मामला, दोनों बहनों को अजमेर सीडब्ल्यूसी ने बालिका गृह भेजा

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अजमेर

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Manish Singh

Aug 17, 2025

बिखरे हुए सपने : दो मासूम बहनों से छिना परिवार का प्यार

बिखरे हुए सपने : दो मासूम बहनों से छिना परिवार का प्यार

अजमेर(Ajmer News). एक ऐसी कहानी जो दिल को झकझोर देगी...। दो मासूम बहनें जो माता-पिता के होते हुए उनके प्यार से वंचित हो गईं। जन्मदात्री ने दूसरी शादी रचाकर अपने जीवन की राह बदल ली, तो कुछ साल बाद पिता ने भी दूसरा ब्याह रचा लिया। सौतेले भाई बहन दुनियां में आए तो नई मां ने भी मुंह मोड़ लिया। माता-पिता के ठुकराने के बाद ननिहाल से भी आशा थी, लेकिन वहां भी उन्हें ठोकरें ही मिलीं।

यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि ब्यावर जिले के जवाजा गोहाना रीको एरिया की दो मासूम बहनों के जीवन की हकीकत है। उनके जीवन में बचपन से उनकी मां ने दुनिया के ताने और अपनों के पग-पग पर ठुकराने की इबारत लिख दी। आखिर 15 अगस्त को दोनों बहनें अपनी आखिरी उम्मीद के टूट जाने के बाद देहरी लांघकर ब्यावर के सुभाष उद्यान में पहुंची, जहां दिन तो गुजर गया लेकिन रात में संदिग्ध हालात में बैठी मिलने पर चौकीदार ने पुलिस को सूचित कर दिया। ब्यावर सिटी थाना पुलिस दोनों बहनों को थाने ले गई। ननिहाल से मामा और नानी आईं, लेकिन दोनों ने उन्हें साथ रखने से इनकार कर दिया। आखिर पुलिस ने दोनों बहनों को अजमेर की जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अंजली शर्मा के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें पुनर्वास के लिए नारीशाला स्थित बालिका गृह भेज दिया।

माता-पिता ने रचाया दूसरा ब्याह

पत्रिका पड़ताल में आया कि दोनों बहनों की जिंदगी में तमाम रिश्ते होने के बावजूद उन्हें प्यार और सहारा नहीं मिला। जन्म देने वाली मां के नाते प्रथा में दूसरी शादी करने के बाद कुछ साल तक तो पिता का प्यार मिला। आखिर पिता ने भी दूसरी शादी रचा ली। कहने को नई मां मिल गई, लेकिन सौतेले भाई बहन दुनियां में आए तो माता-पिता का प्यार छूट गया। आखिर पिता ने रेलवे डाक सेवा में सेवारत मामा के जरिए ननिहाल भेज दिया, लेकिन यहां भी उन्हें नफरत मिली।

नाबालिग पर प्रौढ़ से शादी का दबाव

सीडब्ल्यूसी की काउंसलिंग में सामने आया कि ननिहाल में नाबालिग बहनों में बड़ी बहन पर अपनी उम्र से दोगुनी उम्र के व्यक्ति से शादी का दबाव बनाया गया। बालिका ने बगावत की तो उन्हें घर छोड़कर जाने की राह दिखा दी गई। आखिर उन्होंने घर छोड़ने का फैसला कर लिया लेकिन जाए कहां? यह नहीं सूझा। आखिर किस्मत ने उन्हें सुभाष उद्यान से थाने और फिर थाने से अजमेर की नारीशाला स्थित बालिका गृह पहुंचा दिया।

...चाहती है पढ़ना-लिखना

पड़ताल में आया कि दोनों बहनें पढ़ना-लिखना चाहती हैं, लेकिन बदले हालात में पहले रिश्ते छूट गए और फिर पढ़ाई भी छूट गई। परिजन ने कामकाज का भी बोझ तो डाल दिया, लेकिन दोनों बहनों का खाना-खर्च भी उन्हें भारी लगने लगा तो दोनों मासूम बहनों को घर से निकाल दिया।

बनाया जाएगा आत्मनिर्भर

दोनों बालिकाओं को बालिका गृह में रखा गया है। उनका पुनर्वास किया जाएगा। दोनों बहनों को सुरक्षित, प्यार भरा माहौल दिया जाएगा। जहां वे अपने जीवन को फिर से संवार सकेंगी। सरकार के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।- अंजली शर्मा, अध्यक्ष, जिला बाल कल्याण समिति